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गुरुवार, 22 दिसंबर, 2005 को 05:54 GMT तक के समाचार

'बच्चे सूनामी के सदमे से उबर रहे हैं'

संयुक्त राष्ट्र बाल आपदा कोष - यूनिसेफ़ के एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि एशिया में 26 दिसंबर 2004 को आई सूनामी लहरों से हुई तबाही के एक साल बाद बच्चे उस हादसे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बहुत से बच्चों में उसका असर अब भी देखा जा रहा है.

बहुत से बच्चों ने अब भी कहा है कि उन्हें सहायता की ज़रूरत है, मसलन उन्हें स्कूल जाने के लिए मदद और समर्थन चाहिए.

यूनिसेफ़ ने इंडोनेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका और भारत में आठ से 17 साल की उम्र के 1600 से ज़्यादा बच्चों का सर्वेक्षण कराया.

सर्वेक्षण कराए गए देशों में से भारत, श्रीलंका और थाईलैंड में अस्सी प्रतिशत बच्चों ने कहा कि अब उनमें उम्मीद बनी है और भविष्य के बारे में आत्मविश्वास भी बना है.

लेकिन सूनामी से सबसे बुरी तरह प्रभावित इंडोनेशिया में एक तिहाई से ज़्यादा बच्चों में निराशा नज़र आई और उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि उनका जीवन सुधरेगा.

यूनिसेफ़ का कहना है कि इससे उन बच्चों के अनुभवों की गंभीरता का पता चलता है.

भारत और श्रीलंका में जिन बच्चों का सर्वेक्षण कराया उनमें से आधे से ज़्यादा किसी और आपदा की चिंता से भरे नज़र आए.

थाईलैंड में तीन चौथाई बच्चों का कहना था कि उनके अंदर अब भी अपने किसी प्रिय के खोने का डर बना हुआ है.

सारे ही देशों में बहुत से बच्चों का कहना था कि अब वे समुद्र के किनारे पर खेलना या समुद्र में तैरना पसंद नहीं करते हैं.

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले बच्चों में से क़रीब 90 प्रतिशत फिर से स्कूल जाने लगे हैं लेकिन साथ ही तीन चौथाई बच्चों का अब कहना था कि उन्हें स्कूल जाने के लिए मदद की ज़रूरत है.

यूनिसेफ़ का कहना है कि सर्वेक्षण से पता चलता है कि बच्चे सूनामी के सदमे से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनका जीवन उस हादसे से किसी न किसी तरह अब भी प्रभावित है और उन्हें हादसे से उबरने के लिए अभी और सहायता और समर्थन की ज़रूरत है.