सोमवार, 19 दिसंबर, 2005 को 23:42 GMT तक के समाचार
इसराइल में सत्तारूढ़ लिकुद पार्टी के नेता के लिए हुआ चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने जीत लिया है.
दक्षिण पंथी लिकुद पार्टी के नए नेता के लिए हुए चुनाव में नेतन्याहू ने लगभग आधे मत हासिल किए हैं और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व विदेश मंत्री सिलवान शेलॉम ने अपनी हार स्वीकार भी कर ली है.
समझा जाता है कि बेन्यामिन नेतन्याहू को इस चुनाव में 47% मत मिले हैं जबकि शेलॉम को 32 प्रतिशत वोट हासिल हुए.
इसराइली टेलीविज़न ने ख़बर दी है कि शेलॉम ने टेलीफ़ोन करके नेतन्याहू को जीत की मुबारकबाद भी दे दी है.
इस जीत के बाद 56 वर्षीय बेन्यामिन नेतन्याहू मार्च 2006 में होने वाले आम चुनावों में लिकुद पार्टी का नेतृत्व करेंगे.
बेन्यमिन नेतान्याहू ने फ़लस्तीनी क्षेत्रों - ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट से यहूदी बस्तियाँ हटाने की शेरॉन की योजना का विरोध किया था और विरोध स्वरूप उन्होंने वित्त मंत्री पद से भी इस्तीफ़ा दे दिया था.
लिकुद पार्टी के नेता का चुनाव प्रधानमंत्री और पार्टी के मौजूदा नेता अरियल शेरॉन के उस फ़ैसले के बाद कराया गया था जब उन्होंने नवंबर 2005 में पार्टी के नेतृत्व छोड़ने की घोषणा की थी.
शेरॉन और पार्टी
अरियल शेरॉन ने 1973 में लिकुद पार्टी के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
इससे पहले अरियल शेरॉन का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें रविवार को जो दिल का दौरा पड़ा था उससे वह बहुत जल्दी ही उबर जाएंगे.
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन को रविवार रात दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
स्थानीय टेलीविज़न रिपोर्टों के अनुसार शेरॉन कुछ देर के लिए मूर्छित हो गए थे.
हालाँकि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद उनकी चेतना वापस लौट आई थी.
उन्हें येरुशलम में हदाशा यूनीवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
रिपोर्टों के अनुसार इसराइल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्टों को अस्पताल में बुलाया गया था और अस्पताल के आसपास सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गई थी.
अरियल शेरॉन 77 साल के हैं. अब तक उनके स्वास्थ्य को लेकर कभी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई थी.
वर्ष 2001 से देश के प्रधानमंत्री शेरॉन हाल के महीनों में राजनीतिक संकट से ज़रूर जूझते रहे हैं.
उन्होंने पिछले दिनों दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी छोड़कर अपनी नई पार्टी कदिमा का गठन किया था.
उनकी नई पार्टी ने दक्षिणपंथी के साथ-साथ वामपंथी विचार वाले नेताओं को भी आकर्षित किया है.