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सोमवार, 19 दिसंबर, 2005 को 02:41 GMT तक के समाचार

'सेना वापस बुलाने के परिणाम घातक'

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि इराक़ से अमरीकी सैनिकों को जल्दी वापस बुलाने के घातक परिणाम होंगे.

टेलीविज़न पर एक संदेश में बुश ने कहा कि ऐसे किसी फैसले से मध्य पूर्व में ग़लत संकेत जाएंगे और आतंकवादियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे.

उन्होंने कहा कि इस समय इराक़ से सेनाएं वापस बुलाने का अर्थ होगा इराक़ को दुश्मनों के हाथों में सौंप देना.

बुश ने इराक़ के ख़िलाफ युद्ध में जाने के अपने निर्णय का बचाव किया.

उनका कहना था कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में इराक़ अमरीका का मज़बूत सहयोगी बन कर उभरा है और मध्य पूर्व में लोकतंत्र के लिए एक मिसाल.

बुश ने कहा " यहां से छह हज़ार मील दूर जहां मतदान हुआ है. वह दुनिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका अर्थ यही है कि आतंकवाद के ख़िलाफ युद्ध में अमरीका को एक और साथी मिला है. "

हालांकि उन्होंने एक बार फिर यह माना कि इराक़ मे जनसंहार के हथियार नहीं मिले और युद्ध से पहले दी गई खुफ़िया जानकारियां ग़लत थीं.

उन्होंने कहा कि इराक़ में हुए चुनाव पूरे मध्य पूर्व में संसदीय लोकतंत्र की नींव रखने वाले हैं.

इराक़ पर 2003 में हुए हमले के बाद से लेकर अबतक 2100 से अधिक अमरीकी सैनिक और 30 हज़ार से अधिक इराक़ी सैनिकों की मौत हो चुकी है.

युद्ध जायज़ और आवश्यक

बुश ने कहा कि इराक़ के ख़िलाफ युद्ध सही था. उन्होंने अमरीकावासियों से अपील की कि वो एक सही और आवश्यक कारण को देखते हुए धैर्य रखें और ऐसे लोगों की बातों में न आएं जो किसी भी चीज़ को सही नहीं ठहरा सकते.

उन्होंने कहा " युद्ध कठिन है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि हम हार रहे हैं. "

ओवल कार्यालय से दिए अपने संदेश में बुश ने ज़ोर देकर कहा कि इराक़ के अभियान के कारण अमरीका पर होने वाले नए हमलों को रोका जा सका है.

उन्होंने कहा कि इराक़ में आतंकवादियों पर शिकंजा कसता जा रहा है और एक लोकतांत्रिक इराक़ का उदय हो रहा है.

बुश ने कहा " मुझे पता है कि मेरे कुछ फैसलों से भारी नुकसान हुआ है लेकिन ऐसा कोई भी फैसला हल्के में नहीं किया गया था. "

बुश का कहना था " मैं जानता हूं कि यह युद्ध विवादास्पद रहा है लेकिन आप लोगों का राष्ट्रपति होने के नाते जो मुझे सही लगा वो मैंने किया और इसके परिणामों को स्वीकार करने के लिए मैं तैयार हूं. "

चेनी का इराक़ दौरा

इस बीच उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने इराक़ का दौरा किया. 2003 में इराक़ पर हमले के बाद डिक चेनी का यह पहला इराक़ दौरा है.

चेनी की यात्रा को गुप्त रखा गया था और इराक़ के प्रधानमंत्री को भी इस दौरे के बारे में पूर्व जानकारी नहीं थी.

इराक़ पर हमले के फैसले के लिए डिक चेनी की कड़ी आलोचना होती रही है.