शनिवार, 17 दिसंबर, 2005 को 21:09 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने स्वीकार किया है कि उन्होंने सितंबर 2001 के हमलों के बाद देश में टेलीफ़ोन और ईमेल संदेशों पर निगरानी के आदेश दिए थे.
उन्होंने कहा कि उन्हीं लोगों के टेलीफ़ोन और ईमेल संदेशों पर गुप्त निगरानी रखने के आदेश दिए गए थे जिनके अल-क़ायदा और उससे संबंधित अन्य चरमपंथी संगठनों से संबंध रहे हैं.
बुश ने कहा कि संचार-तंत्र पर निगरानी की इस योजना की हर 45 दिन बाद समीक्षा की जाती रही है.
इसी के साथ उन्होंने कहा कि अमरीका की रक्षा करते हुए उसने क़ानून का पालन किया है.
अपने साप्ताहिक रेडियो संबोधन में उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में इस संबंध में शुक्रवार को छपी ख़बर की पुष्टि की, साथ ही इस सूचना को लीक करने वालों पर बरसे भी.
बुश ने कहा कि अख़बार में ख़बर छपने से अमरीका के दुश्मनों को वो जानकारी मिल गई जो कि उन्हें नहीं मिलनी चाहिए थी.
गंभीर विवाद
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ख़बर दी थी कि राष्ट्रपति बुश ने न्यायालय की इजाज़त के बिना ही राष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी से कुछ अमरीकी नागरिकों के टेलीफ़ोन सुनने के लिए कहा था.
अख़बार ने लिखा है कि 2002 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को सैकड़ों लोगों की बिना वारंट के ही जासूसी करने की इजाज़त दी गई.
रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मैककेलन ने इस पर स्पष्टीकरण माँगा है जबकि एक अन्य सीनेटर अर्लेन स्पेक्टर ने इसे "अनुचित" बताया है. स्पेक्टर सीनेट की न्यायिक समिति के चेयरमैन हैं.
ख़बर छपने के बाद डेमोक्रेटों के साथ बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने भी चिंता का इज़हार किया.
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी आमतौर पर देश के अंदर इस तरह की जासूसी करवाने से बचती है.
इससे पहले अमरीकी धरती पर इस तरह की जासूसी आमतौर पर विदेशी दूतावासों तक ही सीमित रहती थी.
आलोचकों ने सवाल उठाया है कि लोगों के टेलीफ़ोनों और ई-मेलों पर जासूसी का यह मामला कहीं वैधानिक तलाशियों के पहलू से संवैधानिक हदों को तो नहीं पार कर गया है.