शुक्रवार, 16 दिसंबर, 2005 को 15:18 GMT तक के समाचार
इराक़ में 15 दिसंबर को हुए चुनाव की निगरानी करने वाले कुछ पर्यवेक्षकों ने कहा कि इस चुनाव में आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानदंड पूरे हुए हैं हालाँकि कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक मुद्दों पर चिंताएँ भी जताई गई हैं.
इंटरनेशनल मिशन फ़ॉर इराक़ी इलेक्शन ने कहा है कि इस कठिन चुनौती का सामना करने के लिए इराक़ी अधिकारियों की तारीफ़ की जानी चाहिए.
इस मिशन के एक प्रवक्ता पॉल डेसी ने कहा कि एक साल में तीन चुनाव घटनाओं को पूरा करना किसी भी देश के लिए एक मुश्किल काम साबित हो सकता है.
ग़ौरतलब है कि इराक़ में जनवरी, 2005 में एक अंतरिम सरकार के चयन के लिए चुनाव हुआ था और अक्तूबर, 2005 में संविधान पर जनमत संग्रह कराया गया था.
प्रवक्ता ने कहा कि 15 दिसंबर को हुआ मतदान जनवरी और अक्तूबर में हुए मतदान से भी ज़्यादा हो सकता है.
इस मतदान के नतीजे एक पखवाड़े में मिलने की संभावना है.
राजधानी बग़दाद में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जनवरी में हुए चुनाव का बहिष्कार करने वाले बहुत सुन्नियों ने बाद में महसूस किया कि ऐसा करना एक ग़लती था और बहिष्कार से उनका प्रभाव कम ही होगा.
संवाददाता के अनुसार मतदान के भारी प्रतिशत से संकेत मिलता है कि ज़्यादा से ज़्यादा इराक़ी लोग मुख्य धारा की राजनीति में शामिल होंगे बशर्ते कि एक ऐसी सरकार बनाई जाए जिसमें सभी धड़ों का प्रतिनिधित्व हो.
भारी मतदान
गुरुवार को इराक़ के लोगों ने देश की पहली पूर्णकालिक सरकार चुनने के लिए मत डाला.
हालाँकि मतदान प्रतिशत के आधिकारिक आँकड़े नहीं आए हैं लेकिन
इराक़ में भारी मतदान होने की ख़बर है. मतदान के दौरान छिटपुट हिंसा की ख़बर है.
बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए दुनिया भर में इराक़ी लोगों की प्रशंसा हो रही है.
अमरीका के राष्ट्रपति ने इस मतदान को ऐतिहासिक बताया है.
चुनाव के बाद इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री ने कहा, "उम्मीद है कि नई सरकार के गठन में कोई दिक्कत नहीं आएगी."
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने इराक़ के संविधान की प्रशंसा की और कहा कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में जीत मिल रही है.