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शुक्रवार, 16 दिसंबर, 2005 को 22:29 GMT तक के समाचार

बुश पर 'जासूसी की इजाज़त' का आरोप

इस तरह के आरोप सामने आए हैं कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सुरक्षा एजेंटों को देश के अंदर ही कुछ अमरीकी नागरिकों पर निगरानी रखने की इजाज़त दी थी.

इन आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

अमरीका अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि राष्ट्रपति बुश ने न्यायालय की इजाज़त के बिना ही राष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी से कुछ अमरीकी नागरिकों के टेलीफ़ोन सुनने के लिए कहा था.

रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मेक्केलन ने इस पर स्पष्टीकरण माँगा है जबकि एक अन्य सीनेटर अर्लेन स्पेक्टर ने इसे "अनुचित" बताया है. स्पेक्टर सीनेट की न्यायिक समिति के चेयरमैन हैं.

यहाँ तक कि जॉर्ज बुश के कुछ सहयोगी भी इस पर विरोध जता रहे हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 2002 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को सैकड़ों लोगों की बिना वारंट के ही जासूसी करने की इजाज़त दी गई.

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी आमतौर पर देश के अंदर इस तरह की जासूसी करवाने से बचती है.

इससे पहले अमरीकी धरती पर इस तरह की जासूसी आमतौर पर विदेशी दूतावासों तक ही सीमित रहती थी.

आलोचकों ने सवाल उठाया है कि लोगों के टेलीफ़ोनों और ई-मेलों पर जासूसी का यह मामला कहीं वैधानिक तलाशियों के पहलू से संवैधानिक हदों को तो नहीं पार कर गया है.

अमरीकी क़ानून के तहत एक गुप्त अदालत की ज़रूरत होती है जिसका नाम विदेशी ख़ुफिया निगरानी न्यायालय होता है.

अमरीकी ज़मीन पर किसी तरह की निगरानी रखने के लिए अधिकारियों को इसकी पूर्व अनुमति लेनी होती है.

बुश प्रशासन के अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का खंडन या पुष्टि करने से इनकार कर दिया लेकिन आतंकवाद विरोधी अभियानों की हिमायत करते हुए एक बयान अवश्य जारी किया, जिसमें कहा गया कि सरकार अनेक हमले रोकने में कामयाब रही है.

यूएस टेलीविज़न पर एक कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा, "राष्ट्रपति ने जो भी क़दम उठाया उन सभी में उन्होंने क़ानूनी दायरे में रहकर ही काम किया."

राइस ने कहा, "वह अमरीकियों को हिफ़ाज़त करने के मामले में अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियों को बहुत गंभीरता से लेते हैं और ऐसा वह क़ानूनी दायरे में रहकर करते हैं."