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बुधवार, 14 दिसंबर, 2005 को 19:29 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
लंदन

ताजमहल बनाने में कितना समय?

प्रश्न - जमुई, बलिया उत्तर प्रदेश के पिंटू कुमार वर्मा का सवाल है आगरा का ताजमहल कितने सालों में बना था और कितने मज़दूरों ने इस पर काम किया.

उत्तर - ताजमहल के निर्माण में 22 साल लगे. इसका निर्माण 1631 में शुरू हुआ था जो 1653 में पूरा हुआ. इसे बनाने के लिए बीस हज़ार मज़दूरों ने काम किया, जिनमें भारत के अलावा फ़ारस और तुर्की के मज़दूर भी थे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने इस मक़बरे को अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था.

प्रश्न - जिवारा, कटनी मध्य प्रदेश से आनंद कुमार मिश्रा जानना चाहते हैं कि भारत की सबसे बड़ी मस्जिद कौन सी है.

उत्तर - दिल्ली की जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है. इसका निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने कराया था. कोई पाँच हज़ार कारीगर 1644 से लेकर 1658 तक इसके निर्माण कार्य में लगे रहे. इसका पुराना नाम था मस्जिदे जहाँनुमा. पूर्वी मुख्य द्वार का प्रयोग शायद बादशाह किया करते थे, जो आमतौर पर बंद रहता है.

पश्चिमी भाग में बनी इबादतगाह में नमाज़ पढ़ी जाती है लेकिन जुमे के रोज़ या फिर ख़ास-ख़ास मौक़ों पर नमाज़ियों की क़तारें दालान तक फैल जाती हैं. मस्जिद के उत्तरी द्वार के पास एक अल्मारी है जिसमें पैगंबर हज़रत मोहम्मद के कुछ स्मृति चिन्ह रखे हैं, हिरन की खाल पर लिखा क़ुरान, मोहम्मद साहब की दाढ़ी का बाल, उनकी चप्पलें और संगमरमर के एक पतथर पर बना उनके पाँव का निशान.

प्रश्न - बरेली से हमारे एक बहुत पुराने श्रोता राम अवतार गुप्त लिखते हैं कृपया ये बताइये कि ब्रिटिश सिक्का पाउंड किन धातुओं से बनता है.

उत्तर - ब्रिटेन की सरकार ने 1983 में एक पाउंड के नोट की जगह सिक्का चलाया. इसमें 70 प्रतिशत तांबा है, साढ़े 24 प्रतिशत ज़िंक और साढ़े पाँच प्रतिशत निकिल. इसका वज़न साढ़े नौ ग्राम और इसका व्यास साढ़े 22 मिलीमीटर.

प्रश्न - गाँव खेड़ी करमु, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर से चौधरी वारु सिंह पूछते हैं मक्का और मदीना में हज़रत मोहम्मद से पहले कौन सा धर्म प्रचलित था.

उत्तर - इस्लाम के आने से पहले मक्का मदीना में विभिन्न देवी देवताओं की पूजा हुआ करती थी. उनके 360 देवी देवता थे, जिनकी मूर्तियाँ काबा में रखी हुई थीं. जब हज़रत मोहम्मद ने 610 ईसवी में इस्लाम का प्रचार शुरु किया तो कहा कि एक ख़ुदा को मानो. इस्लाम का शाब्दिक अर्थ भी यही है, ख़ुदा के आगे आत्म समर्पण.