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बुधवार, 14 दिसंबर, 2005 को 15:42 GMT तक के समाचार

तुएनी के जनाज़े में हज़ारों की भीड़

लेबनान में सीरिया विरोधी एक अख़बार के मालिक और सांसद जिबरान तुएनी के जनाज़े में बुधवार को हज़ारों लोग शामिल हुए.

ग़ौरतलब है कि तुएनी की सोमवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में एक कार बम धमाके में मौत हो गई थी.

जनाज़े में शिरकत करने वाले बहुत से लोग लेबनान का झंडा लहरा रहे थे. तुएनी का जनाज़ा बेरूत की सड़कों से धीरे-धीरे गुज़ारा गया.

सीरिया विरोधी गुटों ने इस मौक़े पर आम हड़ताल का आहवान किया था. बेरूत के अलावा देश के कुछ अन्य इलाक़ों में भी हड़ताल रखी गई.

लेबनान में कुछ लोगों का आरोप है कि तुएनी की हत्या के पीछे सीरिया का हाथ हो सकता है लेकिन सीरिया इन आरोपों का खंडन करता है.

लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की भी फ़रवरी 2005 में एक कार बम धमाके में मौत हो गई थी. उनके जनाज़े में जो दृश्य था लगभग वही दृश्य तुएनी के जनाज़े में भी देखा गया.

जनाज़े में शामिल लोग नारे लगा रहे थे, "जिबरान हम सबके अंदर जीवित हैं."

कुछ लोगों ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और लेबनान के सीरिया समर्थक राष्ट्रपति एमाइल लाहौद के विरोध में भी नारे लगाए.

कुछ नारे थे - "लाहौद पर धिक्कार है, इस्तीफ़ा दे दो. हमारा राष्ट्रपति सीरिया के जूतों तले है. सीरिया बाहर जाओ."

बहुत से लोग तुएनी के जनाज़े को छूकर देखना चाहते थे और इसके लिए उन्हें ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी जिससे धक्का-मुक्की भी हुई.

तुएनी के सम्मान में लेबनान की संसद में मौन भी रखा गया.

48 वर्षीय तुएनी हाल ही में फ्रांस से वापस लौटे थे और एक दिन बाद ही कार बम धमाके में उनकी मौत हो गई.

उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं इसलिए वे अगस्त में फ्रांस चले गए थे.