इराक़ के लोग संसदीय चुनाव के लिए मतदान कर रहे हैं. 2003 में अमरीका के नेतृत्व में इराक़ पर हुए हमले के बाद पहली बार पूर्णकालिक सरकार चुनने के लिए इराक़ में मतदान हो रहा है.
चुनाव शुरु होने के थोड़ी देर बाद ही राजधानी बग़दाद में एक धमाके की ख़बर है.
इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने इराक़ियों से कहा है कि वे मतदान के दिन को राष्ट्रीय एकता और जश्न का दिन बनाएँ.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी इराक़ी लोगों से मतदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा, "इस मतदान से इराक़ में एक नए अध्याय की शुरूआत होगी. "
बीबीसी के बग़दाद संवाददाता का कहना है कि इस बार मतदान का प्रतिशत काफ़ी ज़्यादा रहने की उम्मीद है.
सुन्नी समुदाय
माना जा रहा है कि सुन्नी समुदाय के लोग भी इस बार बड़ी संख्या में वोट डालने आएँगे.
पिछली बार सुन्नी समुदाय के ज़्यादातर लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था.
चुनाव में हिस्सा लेने पर सुन्नियों की राय के बारे में एक सुन्नी उम्मीदवार सलेह अल मुतलाक़ ने बताया, "अपने जीवन को सुरक्षित बनाने का उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. कई सुन्नियों को लगता है कि अगर ये सरकार दोबारा आ गई तो देश में गृहयुद्ध हो सकता है."
विद्रोही
विद्रोहियों में चुनाव में हिस्सा लेने के मसले पर मतभेद हैं.
जहाँ अल क़ायदा ने इन चुनावों को दिखावा करार दिया है वहीं दूसरे विद्रोही गुटों ने अपने समर्थकों से इसमें भाग लेने की अपील की है.
कुछ ने तो मतदान केंद्र की सुरक्षा करने की बात कही है.
मतदान को ध्यान में रखते हुए इराक़ में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. हालांकि अक्तूबर में हुए जनमतसंग्रह के मुक़ाबले इस बार चुनाव पूर्व हिंसा काफ़ी कम हुई है.
लेकिन इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हिंसा में आई कमी चुनाव के बाद फिर ज़ोर पकड़ सकती है.
उधर इराक़ में चुनाव से पहले अमरीका के राष्ट्रपति बुश ने इराक़ पर हमला करने के फ़ैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि इस चुनाव से मध्य पूर्व एशिया में लोकतंत्र को बढ़ावा मिलेगा.