बुधवार, 14 दिसंबर, 2005 को 21:40 GMT तक के समाचार
यूरोपीय संसद में तमाम दलों के नेता अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की यूरोप में गुप्त उड़ानें और जेलें होने के आरोपों की जाँच कराने पर सहमत हो गए हैं.
इस वास्ते यूरोपीय संसद की एक अपनी समिति गठित की जाएगी जो मानवाधिकारों की स्थिति पर नज़र रखने वाली संस्था काउंसिल ऑफ़ यूरोप से अलग जाँच करेगी.
संसदीय समिति के गठन के मुद्दे पर औपचारिक रूप से गुरूवार को मतदान होने की संभावना है.
काउंसिल ने मंगलवार को अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में कहा था कि इस तरह के आरोपों में कुछ दम नज़र आता है कि सीआईए यूरोप के कुछ देशों में गुप्त बंदीगृह चलाता रहा है.
स्ट्रासबुर्ग़ स्थित यूरोपीय संसद में बीबीसी संवाददाता एलिक्स क्रोएजर का कहना है कि यूरोपीय सांसद इन आरोपों पर गंभीर रूप से चिंतित रहे हैं कि सीआईए आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्ध लोगों को यूरोप में गुप्त बंदीगृहों में रखता रहा है.
अब संसद में सभी दलों के नेता इस बात पर सहमत हुए हैं कि इन आरोपों की जाँच कराई जाए जिसके लिए एक बाक़ायदा यूरोपीय संसद की एक समिति बनाई जाएगी.
यूरोपीय संघ के न्याय आयुक्त फ्रेंको फ्रैटिनी ने संसद में बोलते हुए यह संसदीय समिति बनाए जाने की घोषणा की.
उन्होंने पहले कहा था कि अभी तक ऐसे बंदीगृहों के कोई ठोस सबूत तो नहीं हैं और सबूतों के अभाव में उन्हें यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की तरफ़ से किए जाने वाले खंडन पर विश्वास करना पड़ रहा है.
"लेकिन यूरोपीय सांसदों ने अब इस मामले में आगे बढ़ने का फ़ैसला किया है."
जर्मन संसद भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्ध लोगों के अपहरण और उन्हें एक देश से दूसरे देश में ले जाने के मामलों पर विचार कर रही है.
एक जर्मन मंत्री ने कहा कि एक जर्मन नागरिक ख़ालिद अल मसरी के अपहरण में किसी अधिकारी का कोई हाथ नहीं रहा है.
मंत्री ने कहा कि ख़ालिद अल मसरी को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंटों ने 2003 में पकड़ा था और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान ले जाया गया था जहाँ उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया.
उधर ब्रितानी सरकार ने इन आरोपों की जाँच कराने की माँगों को ख़ारिज कर दिया है कि क्या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्ध लोगों को उन देशों में ले जाने के लिए ब्रितानी हवाई अड्डों का इस्तेमाल किया गया जहाँ उन्हें यातना दी जा सकती हो.