अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने बुश प्रशासन के इस दावे को बिल्कुल ग़लत बताया है कि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के प्रयासों से अमरीकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.
मॉन्ट्रियल जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के आख़िरी दिन क्लिंटन का बयान ऐसे समय आया जब तापमान बढ़ाने वाली ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा कम करने के मुद्दे पर अमरीका अलग-थलग पड़ता नज़र आ रहा है.
उल्लेखनीय है कि प्रदूषण फैलाने के मामले में अमरीका दुनिया का सबसे बड़ा देश है. लेकिन बुश प्रशासन ने धरती के बढ़ते तापमान से निपटने के उद्देश्य से की गई क्योटो संधि में शामिल होने से इनकार करता रहा है.
इस बीच ख़बरों में बताया गया है कि सम्मेलन में प्रतिनिधियों के बीच ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन कम करने के मुद्दे पर अगले दौर की बातचीत शुरू करने पर अनौपचारिक समझौता हो गया है.
लेकिन यह समझौता अमरीकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना हुआ.
ब्रिटेन की पर्यावरण मंत्री मार्ग्रेट बेकलेट ने कहा कि अमरीकी प्रतिनिधियों को मॉन्ट्रियल सम्मेलन में प्रगति हासिल करने पर जताई गई सहमति बार-बार याद दिलाई गई.
एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हो सकता है कि अभी कई घंटों तक बातचीत हो.
अमरीका दुनिया में सबसे ज़्यादा ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन करने वाला देश है लेकिन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने क्योटो संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है.
क्योटो संधि में दुनिया में बढ़ रहे तापमान को रोकने के लिए उपाय करने का आहवान किया गया है.
लेकिन अमरीका ने इस संधि पर यह कहते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है कि इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.