सोमवार, 05 दिसंबर, 2005 को 14:02 GMT तक के समाचार
कई दशकों से चली आ रही समलैंगिक जोड़ों की एक बड़ी माँग पूरी हो गई है, वे शादी तो नहीं कर सकते लेकिन क़ानून में परिवर्तन के बाद उनके संबंध को मान्यता मिल गई है.
इसे शादी तो नहीं कहा जाएगा लेकिन समलैंगिक जोड़ियों को 'सिविल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया जा रहा है जिसके तहत दोनों व्यक्तियों को पति-पत्नी जैसे ही अधिकार होंगे.
सोमवार सुबह से बड़ी संख्या में समलैंगिक जोड़े रजिस्ट्रार के दफ़्तर में पहुँचने शुरू हो गए जहाँ वे प्रमाणपत्र के लिए आवेदन जमा कर रहे हैं.
वर्षों से इस माँग को लेकर अभियान चलाने वाले लोगों का कहना है कि समलैंगिक जोड़ों के साथ होने वाला भेदभाव इस नए प्रावधान की वजह से कम हो जाएगा.
नए क़ानून के मुताबिक़ लोगों को इसके लिए पहले स्थानीय काउंसिल के दफ़्तर में नोटिस देना होगा उसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन होगा.
भीड़
माना जा रहा है कि इस वर्ष के समाप्त होने से पहले तक सैकड़ों समलैंगिक जोड़े इस नए प्रावधान का लाभ लेने के लिए सामने आ सकते हैं.
ब्रितानी सामाजिक न्याय मंत्री मेग मुन का अनुमान है कि पहले वर्ष में लगभग 4500 समलैंगिक जोड़ों का रजिस्ट्रेशन होगा.
उन्होंने बीबीसी से एक बातचीत में कहा, "यह एक महत्वपूर्ण क़दम है, क़ानून की नज़रों में उस रिश्ते को मान्यता मिल गई है जिसका पहले कोई क़ानूनी अस्तित्व नहीं था."
उन्होंने बताया, "इसके तहत समलिंगी जोड़ों के भी वही अधिकार और दायित्व होते हैं जो विवाहित जोड़ों के. हम जानते हैं कि जो लोग पिछले 40 वर्षों से एक साथ रह रहे हैं वे कितने लंबे समय से इस क़ानून का इंतज़ार कर रहे थे."
उनका कहना है कि आख़िर समलैंगिक जोड़ों की भी वही चिंताएँ हैं जो विवाहित लोगों की हैं, पेंशन, उत्तराधिकार, संपत्ति का बँटवारा वग़ैरह.
समलैंगिक जोड़ों और उनके अधिकारों के लिए अभियान चलाने वाले संगठनों ने जहाँ इसका स्वागत किया है वहीं कई ईसाई संगठन ने इस पर रोष प्रकट किया है.