सोमवार, 05 दिसंबर, 2005 को 16:51 GMT तक के समाचार
इराक़ के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ चल रहे जनसंहार के मुक़दमे में पहली बार एक गवाह ने उनके ख़िलाफ़ बयान दिया है.
अहमद हसन मोहम्मद नाम के गवाह ने अदालत को बताया कि किस तरह 1982 में बग़दाद के निकट दुजैल गाँव में 148 शिया मुसलमानों को क़त्ल कर दिया गया था.
इस गवाह की पेशी से पहले अदालत की कार्रवाई क़रीब एक घंटे के लिए रूक गई थी जब सद्दाम हुसैन के वकील अदालत से उठकर चले गए थे.
सद्दाम हुसैन और उनके वकील अदालत की वैधता पर सवाल उठाना चाह रहे थे जिसकी अनुमति अदालत ने नहीं दी.
अदालत में सद्दाम हुसैन के अलावा सात अन्य अभियुक्तों पर दुजैल जनसंहार के लिए मुक़दमा चल रहा है, अगर इस मामले में दोषी पाए गए तो इन लोगों को मौत की सज़ा हो सकती है.
अहमद हसन मोहम्मद ने अदालत को बताया, "मेरे एक दोस्त को बहुत पीटा गया, उसे मेरी आँखों के सामने मार डाला गया. बहुत सारे लोगों को गिरफ़्तार करके जेल ले जाया गया, उन्हें वहीं मार डाला गया, यहाँ तक कि बच्चों वाली औरतों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था."
मोहम्मद ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने कई पड़ोसियों की लाशें देखीं थीं और वहाँ इन सात अभियुक्तों में से कुछ लोग मौजूद थे.
दुजैल में 1982 में हुई घटना का विवरण देने के लिए अदालत में लगभग 10 गवाहों को पेश होना है.
हंगामा
सोमवार को अदालत की कार्यवाही काफ़ी हंगामे के साथ शुरू हुई, सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई बरज़ान अल तिकरीती ने कटघरे में 'इराक़ जिंदाबाद' के नारे लगाए.
एक अन्य अभियुक्त ने कहा, "यह सब नाटक करने की क्या ज़रूरत है हमें सीधे मार डालो."
सद्दाम हुसैन ने ऊँची आवाज़ में कहा कि बचाव पक्ष को अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं दिया जा रहा है, जब सद्दाम हुसैन के वकील अदालत से उठकर चले गए तो जज ने कहा कि उनकी जगह दूसरे वकील रखे जा सकते हैं.
इस सद्दाम हुसैन ने कहा, "मुझे अमरीकी वकील नहीं चाहिए."