बुधवार, 30 नवंबर, 2005 को 16:33 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि उन्हें ‘इराक़ में पूर्ण विजय’ के अलावा और कुछ भी मंज़ूर नहीं है.
अपने भाषण में उन्होंने इराक़ से अमरीकी सैनिकों को हटाए जाने और नियंत्रण इराक़ी सैनिकों को सौंपने की योजना के बारे में चर्चा की.
लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया, “काम पूरा होने तक अमरीकी सैनिक इराक़ में रहेंगे चाहे उसके लिए और सैनिक क्यों न भेजने पड़ें.”
अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि इराक़ी सैनिक धीरे-धीरे देश की ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहे हैं.
उनका कहना था कि इराक़ की ज़रूरतों के मुताबिक़ सैनिकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार लाया गया है.
नीति में बदलाव
अपने भाषण में जॉर्ज बुश ने इराक़ में जारी लड़ाई को जीतने के लिए ज़रूरी राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर बात की.
अमरीका ने ‘इराक़ विजय रणनीति’ पर एक दस्तावेज़ जारी किया है. इसमें इराक़ से अमरीकी सेना हटाए जाने के लिए समयसीमा तय करने की बात से साफ़ इनकार किया गया है.
अपनी तरह का ये पहला दस्तावेज़ है जिसे सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है. इसमें बताया गया है कि अमरीका इराक़ में किसे दुश्मन के तौर पर देखता है.
इसमें तीन गुट शामिल किए गए हैं. पहले तो वे अल्पसंख्यक सुन्नी जो अब इराक़ में उतने प्रभावशाली नहीं रहे.
अमरीका का कहना है कि अगर इराक़ की नई सरकार अल्पसंख्यकों के हितों का ध्यान रखती है तो सुन्नी समुदाय का विरोध अपने आप कम हो जाएगा.
दूसरे गुट में अमरीका ने सद्दाम हुसैन के समर्थकों को रखा है. अमरीका का मानना है कि धीरे-धीरे उनका प्रभाव कम हो जाएगा.
तीसरे गुट में हैं अल क़ायदा से जुड़े विद्रोही. अमरीका का मानना है कि इन लोगों को ख़त्म करना होगा या पकड़ना होगा.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति बुश जानते हैं कि अपनी कम होती लोक्रप्रियता पर अकुंश लगाने और अगले साल होने वाले कांग्रेस के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ मज़बूत रखने के लिए लोगों को ये जताना ज़रूरी है कि उन्होंने इराक़ से निकलने की योजना बनाई है.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ इसे अमरीका की नीति में बदलाव के रुप में देखा जा रहा है.
सीनेट ने हाल ही में निर्णय किया था कि इराक़ के मुद्दे पर बुश प्रशासन समय-समय पर रिपोर्ट दे.