रविवार, 27 नवंबर, 2005 को 03:03 GMT तक के समाचार
राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं ने कड़े शब्दों में जारी बयान में कहा है कि विकसित देश अगले महीने विश्व व्यापार संगठन की बैठक में लचीला रूख़ अपनाएँ.
माल्टा में हो रहे राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन में जारी इस बयान में कहा गया है कि अमीर देश राजनीतिक साहस का परिचय दें, ख़ासकर कृषि और बाज़ार खोलने के मुद्दे पर.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये बयान मोटे तौर पर यूरोपीय संघ के लिए था.
ज़्यादातर राष्ट्रमंडल देशों का आरोप है यूरोपीय संघ ने अपने किसानों के लिए सब्सिडी ख़त्म नहीं की है.
विश्व व्यापार में राष्ट्रमंडल देशों की 30 फ़ीसदी भागीदारी है.
'गंभीर परिणाम'
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने सम्मेलन में आगाह किया कि अगर हाँगकाँग में होने वाली विश्व व्यापार संगठन की बैठक विफल रही तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.
उन्होंने कहा, “ग़रीब देशों को अमीर देशों में ऊंची शुल्क दरों का सामना करना पड़ता है. अगर ग़रीब देशों को अपने पैरों पर खड़ा करना है तो अमीर देशों को अपने बाज़ार खोलने होंगे.”
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने शिखर सम्मेलन में कहा था कि अमीर देशों को कृषि सब्सिडी ख़त्म करने के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ का कहना था, “मुक्त अर्थव्यवस्था बनाने के लिए विकसित देशों को आगे आना चाहिए.”
मतभेद
टोनी ब्लेयर ने सम्मेलन में कहा कि अगर हॉंगकॉंग में होने वाली बैठक सफल रही तो इससे सालाना 350 अरब डॉलर का व्यापार होगा.
लेकिन कृषि सब्सिडी के मुद्दे को लेकर मतभेद बने हुए हैं. ये मतभेद न सिर्फ़ विकसित और विकासशील देशों में है बल्कि अमरीका और यूरोपीय संघ में भी हैं.
भारत और ब्राज़ील जैसे विकासशील देशों का कहना है कि अमीर देशों में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी से विश्व स्तर पर कृषि उत्पादों के दामों में गिरावट आती है.
मतभेदों के चलते 2006 तक की समयसीमा ख़त्म होने से पहले समझौता होने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है.
टोनी ब्लेयर ने कहा है कि अगले हफ़्ते जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की लंदन में बैठक हो रही है. इसमें भारत, ब्राज़ील और चीन भी शामिल होंगे.