सोमवार, 21 नवंबर, 2005 को 11:48 GMT तक के समाचार
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने लिकुड पार्टी छोड़ दी है और राष्ट्रपति से देश में समय से पहले चुनाव कराए जाने की माँग की है.
उन्होंने अपनी गठबंधन सरकार के गिरने के बाद ये फ़ैसला किया.
सोमवार को उन्होंने देश के राष्ट्रपति मोशे कात्सव से मुलक़ात की और उनसे संसद को भंग किए जाने की सिफ़ारिश की.
उन्होंने राष्ट्रपति से जल्द से जल्द देश में चुनाव कराए जाने की माँग की. राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि चुनाव अगले महीने हो सकते हैं.
प्रधानमंत्री शेरॉन सत्ताधारी लिकुड पार्टी के संस्थापकों में रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी के पास एक पत्र भेजकर कहा है कि वे पार्टी छोड़ रहे हैं और एक नई मध्यमार्गी पार्टी बनाने जा रहे हैं.
लिकुड पार्टी के कम-से-कम 14 सांसदों ने शेरॉन का साथ देने की घोषणा की है जिनमें पाँच मंत्रिमंडल के सदस्य हैं.
जुआ
बीबीसी के एक विश्लेषक का मानना है कि अरियल शेरॉन ने ये फ़ैसले कर एक बड़ा जुआ खेला है.
इससे शेष विश्व और विशेष रूप से फ़लस्तीनी नेताओं के लिए चिंता की स्थिति पैदा हो जाएगी कि इसराइल में जो हो रहा है उसका मतलब क्या है.
शेरॉन के सहयोगियों का कहना है कि वे पार्टी के दक्षिणपंथी तत्वों से अलग होना चाहते थे जिन्होंने गज़ा पट्टी से हटने के इसराइली फ़ैसले का विरोध किया था.
यरूशलम स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि शेरॉन के लिकुड पार्टी छोड़ने से इसराइल में शक्ति संतुलन में काफ़ी उलटफेर हो सकता है.
जानकारों का ये भी कहना है कि 77 वर्षीय शेरॉन के लिए एक नयी पार्टी का गठन करना आसान नहीं होगा. क्योंकि उन्हें लेबर पार्टी के नए नेता आमिर पेरेज़ से भी कड़ी चुनौती मिल सकती है.
इसराइल में हुए जनमत सर्वेक्षणों में पेरेज़ की बढ़ती लोकप्रियता का भी अंदाज़ा होता है.
विचार-विमर्श
यरूशलम से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने पिछले दो दिनों में अपने क़रीबी सलाहकारों और विपक्षी नेताओं से भी विचार-विमर्श किया.
बीबीसी संवाददाता का ये भी कहना है कि ऐसा संभव है कि अगर शेरॉन ने पार्टी छोड़ी तो वे अपने साथ बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं को लेकर भी जाएँगे जो फ़लस्तीनियों के बातचीत करने के पक्ष में तो नहीं ही है वह उन पर शासन करने का भी समर्थन नहीं करता.
बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से शेरॉन की गठबंधन सरकार पर ख़तरे के बादल मंडरा रहे थे और सभी इस तैयारी में जुट गए थे कि जल्द ही आम चुनाव होंगे.
उनका कहना है कि अगर शेरॉन ने पार्टी छोड़ने का फ़ैसला किया है तो उन्होंन अपनी स्थिति को मज़बूत देखते हुए ही ऐसा किया है.
इस समय शेरॉन इसराइल की राजनीति के केंद्र में हैं.