रविवार, 20 नवंबर, 2005 को 13:50 GMT तक के समाचार
जर्मनी उन न्यूरमबर्ग मुक़दमों की साठवीं वर्षगाँठ मना रहा है जिनमें अनेक नाज़ी नेताओं पर युद्धापराधों के आरोपों में मुक़दमे चलाए गए थे.
इस अवसर पर अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया है.
न्यूरमबर्ग में अमरीका की तरफ़ से अभियन पक्ष के अधिकारी रहे व्हाइटनी हैरिस और अन्य गवाह अदालत के उसी कमरे में मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं जहाँ 22 नाज़ी नेताओं पर मुक़दमा चलाया गया था.
उन मुक़दमों में बारह नाज़ी नेताओं को मौत की सज़ा सुनाई गई थी और सात को लंबी अवधि की क़ैद की सज़ा जबकि तीन नेताओं को बरी कर दिया गया था.
जिन नेताओं पर मुक़दमे चलाए गए थे उनमें नाज़ी वायु सेना के प्रमुख हरमन गोअरिंग, रुडोल्फ़ हैस और जोआचिम वोन रिबनट्रोप शामिल थे.
हिटलर के निकट सहयोगी मार्टिन बोरमैन पर उनकी अनुपस्थिति में ही मुक़दमा चलाया गया था.
बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि न्यूरमबर्ग मुक़दमों ने एक परंपरा की शुरूआत की थी जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय युद्धापाधों के कई मुक़दमे चले थे और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय बना था.
न्यूरमबर्ग न्यायलय की स्थापना मित्र देशों के गुट ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद की थी और नाज़ी नेताओं पर मुक़दमों की सुनवाई जिस पैनल ने की थी उनमें अमरीका, ब्रिटेन और सोवियत संघ के जज शामिल थे.
न्यूरमबर्ग मुक़दमों में अमरीका के प्रमुख वकील रॉबर्ट जैक्सन उन मुक़दमों को मित्र देशों के युद्ध प्रयासों की अगली कड़ी बताया था.
अभियुक्तों पर जो आरोप लगाए गए थे उस समय तक वे नए समझे जाते थे और उनमें युद्ध शुरू करना, युद्धापराध और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध शामिल थे.
न्यूरमबर्ग मुक़दमे ही ऐसा पहला मौक़ा थे जिनमें किसी देश की सरकार के सदस्यों को युद्ध के दौरान उनके कार्यों के लिए निजी तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया गया था.
ज़्यादातर अभियुक्तों ने दावा किया था कि उन पर जो आरोप लगाए गए वे उनके बारे में जानते ही नहीं थे या फिर उन्होंने वे काम किए ही नहीं थे.
उन मुक़दमों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैल गई थी लेकिन जर्मनी के लोगों ने भी उन मुक़दमों में काफ़ी दिलचस्पी दिखाई थी.
बर्लिन में बीबीसी संवाददाता रे फर्लोंग का कहना है कि उस ज़माने में जर्मनी के अख़बार नाज़ी नेताओं के कारनामों और नरसंहार के ख़ौफ़नाक विरवरण से भरे होते थे.