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रविवार, 20 नवंबर, 2005 को 15:00 GMT तक के समाचार

परमाणु मुद्दे पर ईरानी सांसदों का प्रस्ताव

ईरान के सांसदों ने प्रस्ताव पारित किया है कि अगर परमाणु कार्यक्रम को लेकर उनके देश का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजा गया, तो संयुक्त राष्ट्र को कम समय के नोटिस पर उसके परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण नहीं करने दिया जाएगा.

इसका मतलब है कि ईरान उस समझौते का पालन नहीं करेगा जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय जाँचकर्ता कम समय के नोटिस पर परमाणु संयंत्रों का मुआयाना कर सकते हैं.

बीबीसी के तेहरान संवाददाता ने बताया है कि इस बिल पर अभी और विचार होगा और ईरान की गार्डियन काउंसिल को इसे मंज़ूरी देनी होगी. हालांकि इस बात की आशंका काफ़ी कम है कि इसे लेकर कोई दिक्कत पेश आएगी.

मतदान में 197 में से 183 सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया. इस मतदान का सरकारी रेडियो पर सीधा प्रसारण किया गया था.

इससे पहले ईरान के मुख्य वार्ताकार अली लारीजानी ने कहा था कि अगर ईरान का मामला सुरक्षा परिषद के पास भेजा गया तो कड़ा रुख़ अपनाया जाएगा.

वैधानिक जामा

ईरानी संसद के इस प्रस्ताव से अब तक दिए जाने वाले कूटनीतिक बयानों को वैधानिक रुप मिल गया है जिसे ईरान की सरकार को मानना पड़ेगा.

एक सासंद ने बिल से पढ़ते हुए कहा, "ईरान की सरकार को अपने सभी फ़ैसले रद्द करने होंगे और परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान के जो भी अधिकार हैं उसके अंतरगत वो सभी वैज्ञानिक और शोध से जुड़े कार्यक्रम शुरू कर दे."

ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और उसका कहना है कि उसे शांतिपूर्ण मकसद के लिए परमाणु कार्यक्रम विकसित करने का हक़ है.

लेकिन 2002 से पहले ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधयों पर पर्दा डाले रखा.

पिछले साल ईरान और यूरोपीय संघ के बीच हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए ईरान ने इसफ़ाहान में अपने परमाणु केंद्र में काम भी शुरु कर दिया था.

इसके बाद यूरोपीय संघ के साथ बातचीत बंद हो गई थी.

आईएईए

सितंबर में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड की बैठक में ईरान से परमाणु गतिविधियाँ बंद करने के लिए कहा गया था और मामला सुरक्षा परिषद के पास भेजने की चेतावनी भी दी गई थी.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी विएना में मिलने वाली है. इस बैठक में तय किया जाएगा कि प्रतिबंध लगाने के लिए ईरान का मामला सुरक्षा परिषद के पास भेजा जाए या नहीं.

ईरान की संसद का ये अधिवेशन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की बैठक से सिर्फ़ चार दिन पहले आयोजित किया गया है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की एक अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु हथियार का एक अहम हिस्सा कैसे बनाया जाता है, इस बारे में ईरान को जानकारी उस नेटवर्क से मिली थी जिसे पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान चलाते थे.