शुक्रवार, 18 नवंबर, 2005 को 04:29 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का आहवान किया है कि वे बर्मा सरकार पर सुधारों के लिए दबाव डालें.
बुश ने एशिया प्रशांत सहयोग संगठन-एपेक के नेताओं के दक्षिण कोरिया में हो रहे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह आहवान किया.
एशिया प्रशांत सहयोग संगठन - एपेक के 21 देशों का शिखर सम्मेलन शुक्रवार को बूसान में शुरू हुआ.
बुश ने बर्मा में सुधारों के अभाव और वहाँ मानवाधिकारों की हालत पर अपनी चिंता फिर दोहराई.
बुश की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बर्मा के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष मानवाधिकार प्रतिनिधि पाओलो सर्गियो पिनीरो ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से बाधाओं के बावजूद बर्मा में दबाव जारी रखने का अनुरोध किया था.
पिनीरो ने एड्स, टीबी और मलेरिया का मुक़ाबला करने के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय कोष की इस घोषणा की आलोचना की थी कि वह बर्मा में अपना अभियान बंद कर रहा है.
पिनीरो ने कोष के इस फ़ैसले के बारे में कहा कि अभियान बंद करने से बहुत से लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है.
उन्होंने कहा कि बर्मा में लोकतंत्र आसानी से नहीं लाया जा सकता और किसी को इसकी अपेक्षा नहीं करनी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रतिनिधि पिनीरो ने बर्मा की सैनिक सरकार से रेडक्रॉस को लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची से मिलने की इजाज़त देने की भी माँग क है.
ग़ौरतलब है कि आंग सान सू ची को सैनिक सरकार ने 2003 से उनके घर में नज़रबंद किया हुआ है.
सम्मेलन
एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग संगठन यानी एपेक के दो दिन के सम्मेलन में बर्ड फ़्लू, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मामलों पर चर्चा होने की संभावना है.
बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और चीन तथा जापान के रिश्तों में तनातनी का मुद्दा भी उठ सकता है.
एपेक के 21 सदस्य देशों में अमरीका, जापान, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देश शामिल हैं और एपेक देश दुनिया की 57 प्रतिशत अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं.
सम्मेलन के अवसर पर लगभग एक लाख प्रदर्शनकारी भी जुट सकते हैं जिनमें कई ऐसे किसान हैं जो व्यापार में करों की व्यवस्था बदलने के प्रस्ताव से नाराज़ हैं.
चावल के बाज़ार के उदारीकरण का विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने तो ज़हर खाकर जान भी दे दी है.
विश्व व्यापार वार्ता का नया चक्र अगले महीने से हांगकांग में शुरू हो रहा है.
बूसान में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एपेक नेता ये प्रयास करेंगे कि हांगकांग वार्ता चक्र से पहले वे अपना एक संयुक्त मोर्चा बना लें.
फ़िलहाल खेती में सब्सिडी और करों के मामले में असहमति के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता के चक्र में प्रगति रुकी हुई है.