रविवार, 06 नवंबर, 2005 को 22:02 GMT तक के समाचार
ईरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार अली लरीजानी ने फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के विदेश मंत्रियों को पत्र लिखकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है.
ईरान की राजधानी तेहरान में ब्रिटेन के एक राजनयिक ने पुष्टि की है कि उन्हें इस तरह का पत्र मिला है.
बीबीसी के तेहरान संवाददाता फ्रांसिस हेरीसन का कहना है कि अली लरीजानी के इस ताज़ा क़दम से कोई ठोस नतीजा निकलने की कम ही उम्मीद है क्योंकि यूरोपीय देश चाहते हैं कि ईरान पहले अपनी तमाम परमाणु गतिविधियाँ बंद करे तभी कोई बातचीत हो सकती है.
ईरान के परमाणु वार्ताकार अली लरीजानी ने ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों को लिखे पत्र में बातचीत फिर से शुरू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.
ईरानी मीडिया का कहना है कि लरीजानी ने रचनात्मक और तार्किक बातचीत का स्वागत किया है.
अली लरीजानी ने जब से परमाणु वार्ताकार का ओहदा संभाला है तब से यह उनका पहला महत्वपूर्ण क़दम है. उनसे पहले वार्ताकार की अली लरीजानी यह कहकर आलोचना कर चुके हैं कि उन्होंने बहुत ज़्यादा रियायतें दी थीं.
ईरान कहता रहा है कि वह बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. इस बार जो नई बात है वो ये कि ईरान ने बातचीत शुरू करने की पेशकश लिखित तौर पर दी है.
और इस पेशकश को गेंद यूरोपीय देशों के पाले में भेजने के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन यूरोप ने अभी तक यही कहा है कि ईरान पहले यूरेनियम संवर्धन का काम बंद करे तभी बातचीत शुरू हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी की इस महीने फिर से बैठक होगी और तब तक अगर कुछ बदलाव नहीं होता है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा जा सकता है.
इन सब हालात के बीच ईरान ने पिछले सप्ताह अपने एक संवेदनशील सैनिक ठिकाने पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को जाने की इजाज़त दी थी.