गुरुवार, 03 नवंबर, 2005 को 23:51 GMT तक के समाचार
फ़्रांस में लगातार आठवें दिन भी पेरिस के बाहरी इलाक़ो में हिंसा हुई है और युवकों ने कारों को आग लगा दी है और पुलिक पर हमले किए हैं.
प्रशासन के कहना है कि अब ये घटनाएँ छुटपुट ही हैं और उतनी गंभीर नहीं जितनी कुछ दिन पहले थीं.
सरकार ने गुरुवार को हज़ारों पुलिस अधिकारियों को पेरिस के उन बाहरी इलाक़ो में तैनात किया गया है जहाँ हिंसा जारी है. ये अधिकारी सिएन सेंट देनिस नगर में तैनात रहेंगे जहाँ से हिंसा भड़की थी.
तीव्र आलोचना होने के बाद प्रधानमंत्री दॉमिनिक द विलेपाँ संकट सुलझाने के लिए बातचीत करने में जुटे हुए हैं.
उधर फ़्रांस के आंतरिक मंत्री निकोलस सारकोज़ी उन दो लड़कों के परिवारों से मिले हैं जिनकी मौत के बाद हिंसा भड़की थी.
उन्होंने इन अफ़्रीकी मूल के लड़को की मौत की जाँच करवाने का वादा किया है. उनकी बिजली के झटके लगने से तब मृत्यु हो गई थी जब वे पुलिस से छिप रहे थे.
तनाव घटाने की कोशिश
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सारकोज़ी को उम्मीद है कि उनकी पहल से उन इलाक़ों में चल रहा तनाव ख़त्म हो जाएगा.
वहाँ मुसलमान नेताओं ने राजनीतिक नेताओं से अनुरोध किया है कि वे आप्रवासी समुदायों से बेहतर बर्ताव करें.
बुधवार को हुई हिंसा में पुलिस पर गोलियाँ चलाई गईं और 200 कारों को आग लगा दी गई.
हिंसक घटनाएँ
हिंसा पेरिस के बाहर कुछ नगरों में भी फैली और मध्य फ्रांस में स्थित दीजॉं नगर में कुछ कारों को आग लगा दी गई.
बुधवार को उत्तर और पश्चिमी अफ़्रीका के देशों से फ्रांस में आए लोगों के इलाक़ों में पुलिस के साथ झड़पें हुई थीं.
झगड़े ने एक विवाद का रूप लिया था जब फ्रांस के गृह मंत्री निकोलस सार्कोज़ी ने कुछ दिनों पहले दंगाइयों के बारे में कहा कि ये लोग कचरा हैं और इस कचरे को वो वैसे साफ़ कर देंगे जैसे कि किसी फ़ैक्ट्री का कचरा साफ़ किया जाता है.
विश्लेषकों का कहना है कि फ़्राँस के राष्ट्रपति पद के चुनाव दूर नहीं हैं और ऐसे में ये मसला एक राजनीतिक रूप लेता जा रहा है.
इसी विवाद के बीच फ्रांस पुलिस ने, ग़ैर क़ानूनी तरीके से देश में आए लोगों की खोज और सख़्ती से शुरू कर दी है.