गुरुवार, 03 नवंबर, 2005 को 02:04 GMT तक के समाचार
इराक़ के रक्षा मंत्रालय ने मेजर के ओहदे तक के उन अधिकारियों से फिर सेना में लौटने का आग्रह किया है जो सद्दाम हुसैन के शासनकाल में फ़ौज में थे.
इराक़ी सरकार के प्रवक्ता लाइथ कुब्बा का कहना है कि यदि ये अफ़सर सेना में लौटते हैं तो सेना के मनोबल को गिरने से रोका जा सकता है.
बीबीसी के रक्षा संवाददाता रॉब वाटसन का कहना है कि इनमें से ज़्यादातर अधिकारी सुन्नी समुदाय के हैं और अब उनकी माँग इसलिए है क्योंकि इराक़ में जहाँ-जहाँ असंतोष और संघर्ष सबसे ज़्यादा है वो सुन्नी बहुल इलाक़े हैं.
रॉब वाटसन का कहना है कि इराक के रक्षा मंत्रालय का ये एक महत्वपूर्ण कदम है. ये इराक़ के सुन्नियों तक पहुँचने का एक ऐसा प्रयास है जिससे इराक़ की सेना सही मायने में एक राष्ट्रीय सेना बन सकती है.
सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान इराक़ी सेना के कई अफ़सर सुन्नी समुदाय के थे.
लेकिन बीबीसी संवाददाता का ये भी कहना है कि यदि इस योजना के तहत सेना में सुन्नियों की संख्या बढ़ती भी है तो निश्चित तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि इराक़ की नई सेना की सारी समस्याएँ हल हो जाएँगी.
अनुमान यही है कि अब भी सेना में काम कर रहे 70 प्रतिशत सैनिक सद्दाम हुसैन की सेना में काम कर चुके हैं.
इस योजना के बावजूद सेना के सामने घुसपैठियों, ख़राब हथियार और एक भयंकर विद्रोह के बीच नई सेना को खड़ा करने जैसी समस्याएँ मौजूद हैं.