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गुरुवार, 03 नवंबर, 2005 को 06:18 GMT तक के समाचार

पेरिस के बाहरी इलाक़ों में हिंसा जारी

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आज लगातार आठवें दिन भी तनाव जारी हैं, कल रात लगातार सातवीं रात दंगे हुए.

उत्तर और पश्चिमी अफ़्रीका के देशों से फ्रांस में आए लोगों के इलाक़ों में पुलिस के साथ झड़पें हो रही हैं.

फ्रांस के राष्ट्रपति ज्याक शिराक ने स्थिति को ख़तरनाक बताया है.

फ्रांस के मुसलमान नेताओं ने सरकार और राजनेताओं से अपील की है कि वो दूसरे देशों से आकर बसे लोगों से बेहतर व्यवहार करें और उनके प्रति आदर और सम्मान की भावना को न भुलाएँ.

सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में हैं पेरिस के कुछ बाहरी इलाक़े.

झगड़े ने एक विवाद का रूप लिया जब फ्रांस के गृह मंत्री निकोलस सार्कोज़ी ने कुछ दिनों पहले दंगाइयों के बारे में कहा कि ये लोग कचरा हैं और इस कचरे को वो वैसे साफ़ कर देंगे जैसे कि किसी फ़ैक्ट्री का कचरा साफ़ किया जाता है.

विश्लेषकों का कहना है कि फ़्राँस के राष्ट्रपति पद के चुनाव दूर नहीं हैं और ऐसे में ये मसला एक राजनीतिक रूप लेता जा रहा है.

इसी विवाद के बीच फ्रांस पुलिस ने, ग़ैर क़ानूनी तरीके से देश में आए लोगों की खोज कुछ और सख़्ती से शुरू कर दी है.

एक हफ़्ते पहले 15 और 17 साल के दो किशोर पुलिस से बचने के लिए भागे और एक बिजलीघर के पास जा छिपे और दुर्भाग्य से वे वहीं बिजली का झटका लगने से मर गए. इसके बाद दंगे भड़क उठे.

पेरिस में रहने वाले श्रीलंकाई मूल के एंटन कॉलिंस ने बताया कि दंगे में उन्होंने क्या देखा, "मैं अपने रिश्तेदार के घर बैठा था. अचानक काफ़ी शोर होने लगा, खिड़की के बाहर झाँककर देखा, हमने धुआँ देखा और फिर समझ में आया कि पास के स्कूल में आग लगा दी गई है."

फ्रांस में लंबे समय से रह रहीं भारतीय मूल की पत्रकार वैजू नरावने का कहना है कि इस दंगे से आप्रवासी अफ्रीकियों और फ्रांसीसी लोगों के रिश्तों पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं.

उनका कहना है कि अफ्रीकी मूल के फ्रांसीसी नागरिक बुरी हालत में हैं, बेरोज़गार युवको की संख्या अफ्रीकी मूल के समुदाय में काफ़ी अधिक है जिससे लोगों में सरकार के प्रति काफ़ी गुस्सा है जो इन दंगों में फूट पड़ा है.