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मंगलवार, 01 नवंबर, 2005 को 03:20 GMT तक के समाचार

सहयोग न देने के आरोप का खंडन

सीरिया ने इन आरोपों का खंडन किया है कि उसने रफ़ीक़ हरीरी हत्याकांड मामले की जाँच में संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल के साथ सहयोग नहीं किया.

सीरिया ने यह बात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव के बाद कही जिसमें कहा गया है कि सीरिया रफ़ीक हरीरी की हत्या की जाँच में पूरा सहयोग दे वरना उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

ये प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया.

सीरिया के विदेश मंत्री ने कहा कि जाँच रिपोर्ट की तरह ही ये प्रस्ताव भी इस धारणा पर आधारित है कि हत्या में सीरिया का हाथ है.

उन्होंने कहा कि सीरियाई अधिकारियों के झूठे बयान देने के आरोपों के समर्थन में कोई सुबूत नहीं पेश गए हैं.

सीरिया के ख़िलाफ़ ये प्रस्ताव लाने वाले अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन ने समर्थन हासिल करने के लिए प्रस्ताव से उस बात को हटा दिया जिसमें सीरिया पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी.

इसके बदले इस प्रस्ताव में ये कहा गया है कि अगर ज़रूरी हुआ तो सीरिया के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाएँगे. रूस और चीन ने सीरिया पर पाबंदी लगाने वाले प्रस्ताव पर चिंता जताई थी.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लवारोफ़ ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा था कि सुरक्षा परिषद कोई जाँच एजेंसी नहीं है, उन्होंने कहा कि "कूटनीति और आपराधिक मामलों का घालमेल करना ठीक नहीं है."

राहत

बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ रोजर हार्डी का कहना है कि नए प्रस्ताव के शब्दों से सीरिया को थोड़ी राहत मिल सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष जाँच दल का कहना है कि हरीरी की हत्या में सीरिया और लेबनान के कुछ अधिकारियों का हाथ था.

प्रस्ताव में कहा गया है कि सीरिया उन लोगों को हिरासत में ले जिनके नाम संयुक्त राष्ट्र जाँच में लिए गए हैं, इसके अलावा कहा गया है कि गवाहों और संदिग्ध व्यक्तियों से सीरिया के बाहर पूछताछ हो.

सीरिया के पास इस प्रस्ताव पर काम करने के लिए 15 दिसंबर तक का वक़्त है.

लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी एक कार बम धमाके में लेबनान की राजधानी बेरूत में मारे गए थे.

सीरिया इस हत्याकांड में हाथ होने से लगातार इनकार करता रहा है.