मंगलवार, 25 अक्तूबर, 2005 को 14:15 GMT तक के समाचार
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने वर्ष 2007 में एक अरबी टीवी चैनल शुरू करने की घोषणा की है. शुरू में इस चैनल पर 12 घंटे प्रसारण होगा.
यह बीबीसी का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय चैनल होगा जिसे सरकारी पैसे से चलाया जाएगा. लेकिन इस नए अरबी टीवी चैनल को शुरू करने के लिए बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने 42 में से 10 विदेशी भाषा सेवा को बंद करने का फ़ैसला किया है.
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के निदेशक नाइजल चैपमैन ने मंगलवार को इसकी घोषणा की. इस घोषणा के बाद 236 लोगों की नौकरियाँ ख़त्म हो जाएँगी.
बीबीसी कर्मचारियों की यूनियनें एनयूजे और बेक्टू ने 10 विदेशी भाषा सेवा को बंद करने के फ़ैसले की आलोचना की है.
अभी तक बीबीसी वर्ल्ड सर्विस अंग्रेज़ी और 42 अन्य विदेशी भाषाओं में प्रसारण करती है, जिसे विदेश मंत्रालय से वित्तीय सहायता मिलती है.
बंद होंगी कई सेवाएँ
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के निदेशक नाइजल चैपमैन ने बुल्गेरिन, कोएशियाई, चेक, ग्रीक, हंगेरियन, कज़ाख़, पोलिश, स्लोवॉक, स्लोवेनियाई और थाई भाषा में प्रसारण सेवा को बंद करने की घोषणा की.
अगले साल मार्च तक ये सभी भाषा सेवाएँ बंद हो जाएँगी. नाइजल चैपमैन ने कहा कि इनमें से कई सेवाएँ दूसरे विश्व युद्ध के बाद शुरू की गई थी. नाइजल चैपमैन ने इन भाषा सेवाओं के योगदान की सराहना की.
लेकिन कर्मचारियों की यूनियन बेक्टू का कहना है कि वह अरबी टीवी शुरू करने के फ़ैसले का स्वागत करती है लेकिन वे इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि इस फ़ैसले के कारण कई लोगों की नौकरियाँ जा रही हैं.
बेक्टू ने इस फ़ैसले की राजनीतिक वजह बताई और कहा कि इससे बाहर यही संकेत जा रहा है कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस सरकार के एजेंडे पर काम कर रही है.
प्रभाव
एनयूजे ने भी इस फ़ैसले की आलोचना की है और कहा है कि नए यूरोप में ब्रिटेन का प्रभाव इस फ़ैसले से कम होगा.
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के निदेशक नाइजल चैपमैन ने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि शोध से यह पता चला है कि मध्य पूर्व में एक अरबी टीवी चैनल की बड़ी मांग है.
चैपमैन ने कहा, "बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पहले से ही मध्य पूर्व में सबसे सफल, विश्वसनीय और सम्मानित सेवा है."
उन्होंने कहा कि अरबी टीवी चैनल शुरू करने के फ़ैसले के बाद बीबीसी मध्य पूर्व में एकमात्र ऐसी संस्था बन जाएगी, जो अरबी में टीवी, रेडियो और ऑन लाइन सेवा चला रही है.
नाइजल चैपमैन ने पहले की घोषणा कर दी थी कि रणनीति-2010 के तहत वे ऐसी घोषणा करने वाले हैं जो पिछले 70 सालों के दौरान वर्ल्ड सर्विस में सबसे बड़े परिवर्तन होंगे.