मंगलवार, 25 अक्तूबर, 2005 को 23:53 GMT तक के समाचार
इराक़ में विद्रोहियों के साथ संघर्ष में मरने वाले अमरीकी सैनिकों की संख्या दो हज़ार तक जा पहुँची है.
समारा में इस महीने के शुरू में घायल हुए एक सैनिक की मौत के बाद मंगलवार को पेंटागॉन ने बताया कि कुल 2000 अमरीकी सैनिक मारे जा चुके हैं.
मार्च 2003 में अमरीकी हमले के बाद से इराक़ में मारे जाने वाले नागरिकों की संख्या अनाधिकारिक तौर पर 25 हज़ार तक बताई जाती है.
इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति ने दोहराया है कि अमरीकी सैनिक इराक़ में स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए मोर्चे पर डटे रहेंगे.
बग़दाद में मौजूद अमरीकी सेना के एक प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल स्टीव बोएलन ने मीडिया से अनुरोध किया है कि दो हज़ार अमरीकी सैनिकों के मारे जाने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें.
ताक़त-कमज़ोरी
बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता रॉब वाटसन का कहना है कि इराक़ में अमरीकी सेना की कमज़ोरी और ताक़त दोनों बहुत ही नाटकीय ढंग से सामने आई है.
शुरूआत के दिनों में जब इराक़ पर अमरीका ने हमला किया तो उसकी मारक क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता दिखाई दी, सिर्फ़ तीन हफ्ते में उसने सद्दाम हुसैन की सत्ता को उखाड़ फेंका और इस लड़ाई में उसके सिर्फ़ 150 सैनिक मारे गए.
लेकिन कुछ समय बाद जब विद्रोहियों से मुक़ाबला शुरू हुआ तो लगने लगा कि अमरीकी सेना जितनी मज़बूत समझी जाती है, दरअसल उतनी मज़बूत नहीं है.
रॉब वाटसन का कहना है कि अमरीकी सेना एक कमांडर ने उनसे बातचीत में शायद सही ही कहा था कि "अमरीकी सेना शांतिरक्षा के मुक़ाबले लोगों को मारने में अधिक सक्षम है."
इराक़ में सैनिकों के मारे जाने का असर अमरीकी सेना में होने वाली नियुक्ति पर दिख रहा है, अमरीकी सेना के सभी अंगों को नए सैनिकों को आकर्षित करने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है.
इराक़ की लड़ाई की तुलना अब वियतनाम युद्ध से की जाने लगी है जिसमें अमरीका के 60 हज़ार सैनिकों ने जान गँवाई थी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ और वियतनाम की लड़ाई में चाहे जितनी भी समानता या भिन्नता हो लेकिन एक बात ज़रूर है कि यह युद्ध के बारे मे अमरीकी जनमानस पर गहरी छाप छोड़ रहा है.