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बुश ने इराक़ी जनता की पीठ थपथपाई

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ी संविधान को जनमतसंग्रह में मंज़ूरी मिलने पर वहाँ के लोगों की सराहना की है.

यूरोपीय संघ ने इसे इराक़ की स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम बताया है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि संविधान को मंज़ूरी मिलना लोकतांत्रिक इराक़ के विकास की दिशा में अहम क़दम है.

लेकिन इराक़ी सरकार के एक प्रवक्ता लेथ कुब्बा ने कहा है कि नतीजे ये दिखाते हैं कि एक ऐसा क्षेत्र भी है जो संविधान में बदलाव चाहता है.

इराक़ में संविधान पर हुए जनमतंसग्रह के आधिकारिक नतीज़ों के मुताबिक़ संविधान को स्वीकृति मिल गई है.

चुनाव आयोग अधिकारियों ने बताया कि कुल 78 फ़ीसदी लोगों ने संविधान को स्वीकृति दी जबकि 21 फ़ीसीदी लोगों ने इसका विरोध किया.

अगर तीन प्रांतों में दो-तिहाई मतदाता संविधान के मसौदे को नकार देते तो संविधान नामंज़ूर हो सकता था.

सिर्फ़ दो प्रांतों ने संविधान को मंज़ूरी नहीं दी है.

अधिकारियों का कहना है कि निनेवाह प्रांत में 44 फ़ीसदी लोगों ने संविधान को मंज़ूरी दी.

प्रतिक्रिया

संविधान को स्वीकृति मिलने से दिसंबर में संसदीय चुनाव करवाने का रास्ता साफ़ हो गया है.

चुनाव आयोग के सदस्य फ़रीद अयार ने कहा कि मतदान 100 फ़ीसदी सही था.

उन्होंने कहा कि आयोग और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को धोखाधड़ी का ऐसा कोई मामला नहीं मिला जिससे मतदान पर असर हो.

इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफ़री के प्रवक्ता लीथ कुब्बा ने इस बारे में कहा," ये नतीजा राजनीतिक प्रकिया की जीत है. "

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में संविधान की कमियों को दूर करने का तरीक़ा निकाल लिया जाएगा.

शिया और कुर्द समुदाय ने संविधान का समर्थन किया है.

सुन्नी बहुल अनबार और सलाहुद्दीन प्रांतों में संविधान को नकार दिया गया है.

सुन्नी इलाक़ो में संविधान को नामंज़ूर करने के पीछे मुख्य वजह ये थी कि संविधान लागू होने से उत्तर और दक्षिण इराक़ में कुर्द और शियाओं को स्वायत्ता मिल जाएगी.