शुक्रवार, 21 अक्तूबर, 2005 को 07:15 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र की जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या में सीरिया का हाथ होने का संकेत मिलता है.
गुरूवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्याकांड में सीरिया की सीधी भागीदारी का संकेत मिलता है.
इस रिपोर्ट में हरीरी हत्या कांड में लेबनान की मिलीभगत की भी बात की गई है.
जर्मन अधिकारी डेटलेफ़ मेहलिस ने संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल की अगुआई की.
रफ़ीक हरीरी फ़रवरी 2005 में लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए एक कार बम धमाके में मारे गए थे.
डेटलेफ़ मेहलिस ने कहा है कि हरीरी की हत्या की योजना पर कई महीनों तक काम किया गया और एक व्यापक नेटवर्क वाले संगठन ने उस योजना को अंजाम दिया.
'मिलीभगत'
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सोच पाना मुश्किल है कि यह योजना सीरिया और लेबनान के वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारियों की सहमति के बिना यह योजना बनी होगी और उसे अंजाम दिया गया होगा.
इस रिपोर्ट में सीरिया के विदेश मंत्री फारूक़ अल सहारा पर भी जाँच दल को ग़लत सूचनाएँ देकर गुमराह करने का आरोप लगाया गया है.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा है कि रिपोर्ट में सीरिया का नाम आने के बाद आगे क्या कार्रवाई हो इस पर कई देश विचार-विमर्श कर रहे हैं.
संवाददाताओं के अनुसार दमिश्क में वरिष्ठ सीरियाई अधिकारियों से मेहलिस की पूछताछ के बाद से ही ऐसी संभावनाएँ व्यक्त की जा रही थीं कि रिपोर्ट में सीरिया का नाम आ सकता है.
रफ़ीक हरीरी की मौत के बाद लेबनान की राजनीति में तूफ़ान आ गया था. वहाँ की सरकार बदल गई और भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सीरिया को वहाँ से अपनी सेनाएँ हटानी पड़ी.
सीरिया
सीरिया ने रफ़ीक हरीरी की हत्या में अपना कोई भी हाथ होने से हमेशा इनकार किया है.
जाँच रिपोर्ट जारी होने से पहले सीरिया के विदेश उपमंत्री वलीद मुआलेम ने कहा कि अमरीका और फ्रांस इस दस्तावेज़ को सीरिया को अलग-थलग करने के लिए इस्तेमाल करेंगे.
ग़ौरतलब है कि अमरीका और फ्रांस लेबनान से सीरियाई सैनिक हटाने के अभियान में ख़ासे सक्रिय थे.
वलीद मुआलेम ने फ्रांस के एक अख़बार ली फिगारो से कहा कि अब अगला क़दम सीरिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव के रूप में उठाया जाएगा.
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि चीन और रूस ऐसे प्रस्ताव का विरोध करेंगे.