शुक्रवार, 14 अक्तूबर, 2005 को 09:20 GMT तक के समाचार
सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह ने अपने पहले टेलीविज़न इंटरव्यू में कहा "अल क़ायदा के ख़तरो को ख़त्म करने" का आहवान किया है.
शाह अब्दुल्लाह ने अमरीकी टेलीविज़न चैनल से कहा कि इस्लाम एक "शांति का धर्म है" जो 11 सितंबर 2001 जैसे हमलों को ख़ारिज करता है लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चरमपंथ अभी समाप्त नहीं हुआ है.
शाह अब्दुल्लाह ने यह भी कहा कि वह तेल की क़ीमतों में हाल के समय में हुई वृद्धि को मद्देनज़र क़ीमतों को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब दुनिया का सबसे ज़्यादा तेल निर्यात करने वाला देश है. उन्होंने अगस्त 2005 में सऊदी अरब के शाह की गद्दी संभाली थी.
वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता जेम्स कुमरसामी का कहना है कि एबीसी टेलीविज़न चैनल के साथ शाह अब्दुल्लाह के इंटरव्यू को अमरीका में उनके देश की छवि को सुधारने के प्रयासों की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
'महाविपत्ति'
शाह अब्दुल्ला ने अल क़ायदा को "पागल और दुष्ट" और "शैतान का काम" क़रार दिया और कहा कि "इस महाविपत्ति को समाप्त करने के लिए अगर ज़रूरत पड़ी तो 30 साल तक भी लड़ाई की जाएगी."
उन्होंने कहा, "कोई भी ऐसा आदमी जो सभ्य है, जिसमें मानवता है, न्याय का हिमायती है और जिसकी कोई आस्था है, वह इस तरह के काम नहीं कर सकता."
शाह अब्दुल्लाह ने माना कि सऊदी अरब में चरमपंथी गतिविधियों का अब भी ख़तरा है. साथ उन्होंने सवाल भी किया कि "जब यह दुनिया के हर देश में है" तो सिर्फ़ सऊदी अरब पर ही दुनिया की नज़रें क्यों टिकती हैं?
तेल
शाह अब्दुल्लाह ने एबीसी से कहा कि तेल की क़ीमतों में आए उछाल से अन्य देशों को नुक़सान हुआ है लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इन देशों से सऊदी अरब को फ़ायदा हुआ है.
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने तेल का उत्पादन पढ़ाकर एक करोड़ बैरल प्रतिदिन कर दिया है ताकि तेल की बढ़ती माँग को पूरा किया जा सके और क़ीमतों पर भी नियंत्रण में रखा जा सके.
सऊदी अरब में महिलाओं के अधिकारों के बारे में उन्होंने कहा कि वहाँ एक दिन महिलाएँ कार भी चलाना शुरू कर देंगी.