शुक्रवार, 14 अक्तूबर, 2005 को 14:39 GMT तक के समाचार
इराक़ की जनता शनिवार को देश के नए संविधान पर मतदान करेगी. लेकिन इससे एक दिन पहले इराक़ी सुन्नी अरब पार्टी के कार्यालयों पर हमले हुए हैं.
दरअसल पहले संविधान का विरोध कर रही इराक़ी इस्लामिक पार्टी ने अपनी मांग वापस ले ली थी.
फ़लूजा में इस्लामिक पार्टी के मुख्यालय में अज्ञात बंदूकधारियों ने आग लगा दी. इस घटना में पार्टी के कई दस्तावेज़ जल कर ख़ाक हो गए.
यह पार्टी फ़लूजा में बहुत लोकप्रिय है. लेकिन संविधान पर जनमतसंग्रह को लेकर पार्टी के नए रुख़ से लोग काफ़ी नाराज़ हैं.
फ़लूजा के साथ-साथ राजधानी बग़दाद में भी पार्टी के कार्यालय के बाहर एक बम धमाका हुआ. लेकिन इस धमाके में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है.
शनिवार को इराक़ी संविधान पर होने वाले मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इराक़ की सभी सीमाएँ सील कर दी गई है.
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र राजधानी बग़दाद की सड़कों पर निजी कार चलाने पर रोक लगा दी गई है.
आशंका
इराक़ी सेना के मेजर सलमान अब्दुल याहिद ने कहा कि पहले से ही आशंका थी कि इस्लामिक पार्टी के कार्यालय पर हमला हो क्योंकि संविधान पर होने वाले जनमतसंग्रह पर उन्होंने अपना रुख़ बदल लिया है.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ इस्लामिक पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी अला मक्की ने हमलों की आलोचना की और कहा कि पार्टी इराक़ में स्थिरता और आतंकवाद से संघर्ष के लिए राजनीतिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगी.
इस सप्ताह के शुरू में इस्लामिक पार्टी ने कहा था कि वह सुन्नी मुसलमानों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगी कि वे संविधान का समर्थन करें क्योंकि शिया और कुर्द नेता इस पर सहमत हो गए हैं कि वे दिसंबर में होने वाले चुनाव के बाद संविधान में संशोधन के लिए समीक्षा करेंगे.
बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि शनिवार को होने वाले जनमतसंग्रह में डेढ़ करोड़ से ज़्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है.
इराक़ में शिया मुसलमान और कुर्द लोगों का बहुमत है और उम्मीद है कि दोनों समुदाय संविधान के पक्ष में मतदान करेंगे.
अधिकार
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ में पहली बार इन दोनों समुदायों को ज़्यादा अधिकार मिल रहे हैं. उम्मीद है कि 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत संविधान के पक्ष में मिल सकते हैं.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि संविधान को मंज़ूरी मिल ही जाएगी. अगर तीन या ज़्यादा प्रांतों में दो तिहाई मतदाता संविधान के ख़िलाफ़ मतदान करते हैं तो संविधान को मंज़ूरी नहीं मिल पाएगी.
बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि अगर देश के अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय एक सुर में संविधान के ख़िलाफ़ मत देते हैं तो संविधान को मंज़ूरी नहीं मिल पाएगी.
अगर ऐसा हुआ तो एक बार फिर सभी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी. इराक़ियों को फिर से अंतरिम सरकार का चुनाव करना होगा, जो एक बार फिर संविधान का मसौदा तैयार करेगी और फिर उसे जनता के सामने मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा.
अगर इस जनमतसंग्रह में संविधान को मंज़ूरी मिल जाती है तो इराक़ियों को दिसंबर में एक पूर्णकालिक सरकार चुनने का मौक़ा मिलेगा.