सोमवार, 10 अक्तूबर, 2005 को 19:26 GMT तक के समाचार
श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा के ज़रिए पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गए हिंदू परिवार के एक सदस्य के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लिए शुरू हुई इस बस सेवा पर सवार होने वाला ये पहला हिंदू परिवार था.
मारे गए व्यक्ति बस्ती राम के भतीजे कमल टंडन ने बीबीसी की संवाददाता बीनू जोशी को बताया, “हमारे पास पाकिस्तान से फ़ोन आया कि उनकी मौत हो गई है जबकि मेरे पिता और भाई ज़ख़्मी हुए हैं.”
टंडन परिवार जम्मू के बख्शीनगर में रहता है.
इस साल के शुरूआत में भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बीच सेवा शुरू हुई है.
श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच चली इस बस सेवा के शुरू होने से दोनों ओर के न जाने कितने लोगों का सपना सच हो गया-सरहद पार करने का सपना, सालों से जुदा हुए अपनों से मिलने का सपना.
इसी बस पर सवार होकर जम्मू के टंडन परिवार के तीन सदस्य छह अक्तूबर को मुज़फ़्फ़राबाद गए थे.
लेकिन आठ अक्तूबर को पाकिस्तान में आए ज़बर्दस्त भूकंप का क़हर इन लोगों पर भी टूटा.
परिजनों की चिंता
टंडन परिवार के तीन सदस्य- बस्ती राम, जगदीश टंडन और सुभाष टंडन मुज़फ़्फ़राबाद के पास हतिया दुपट्टा गाँव में रिश्तेदार मक़बूल अहमद से मिलने गए थे.
मक़बूल पहले हिंदू थे और 1947 में उनसे बिछड़ गए थे. बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था.
बस्ती राम के भतीजे ने बताया है कि कश्मीर का एक सिख परिवार भी टंडन परिवार के साथ गया था और उन्होंने ने ही बस्ती राम के मारे जाने की बात कही है.
साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि मक़बूल अहमद का पूरा परिवार भूकंप में मारा गया है.
अब टंडन परिवार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गए बाकी दो सदस्यों की सलामती की दुआ कर रहा है.
इसी बस से गए 86 साल के कृपाल सिंह का परिवार भी उनकी सलामती को लेकर चिंतित है.
कृपाल सिंह के बेटे ने पीटीआई को बताया कि उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.