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सोमवार, 03 अक्तूबर, 2005 को 16:06 GMT तक के समाचार

तुर्की ने यूरोपीय संघ का प्रस्ताव स्वीकार किया

तुर्की की सरकार ने यूरोपीय संघ के नए प्रस्ताव को मंज़ूर कर लिया है.

तुर्की की यूरोपीय संघ की सदस्यता के बारे में होने वाली बातचीत से संबंधित यह प्रस्ताव लंबी कूटनीतिक खींचतान के बाद सामने आया था.

इस घोषणा के बाद तुर्की को यूरोपीय संघ में शामिल करने के लिए बातचीत करने का रास्ता साफ़ हो गया है.

तुर्की के विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल ने कहा है कि वे यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों से बातचीत करने के लिए लक्ज़मबर्ग रवाना हो रहे हैं.

इससे पहले कूटनीतिक विवाद बहुत गहरा गया था जब ऑस्ट्रिया ने कहा था कि तुर्की को पूर्ण सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए बल्कि इसके बदले उसे विशेष साझीदार का दर्जा दिया जाना चाहिए.

लेकिन ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों के ज़ोर डालने के बाद ऑस्ट्रिया ने यह माँग छोड़ दी थी.

बात इतनी बिगड़ गई थी कि तुर्की ने बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया था, इसके बाद यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने गहन चर्चा के बाद तुर्की को नया प्रस्ताव भेजा था जिसे उसने अब स्वीकार कर लिया है.

गहरी दरार

दरअसल, सोमवार को तुर्की को यूरोपीय संघ में विधिवत शामिल किए जाने के सवाल पर औपचारिक बातचीत शुरू होने वाली थी, यह बातचीत स्थानीय समय के अनुसार दोपहर तीन बजे होने वाली थी.

लेकिन विवाद की वजह से बातचीत शुरू नहीं हो सकी, यूरोपीय संघ की अध्यक्षता करने वाले देश ब्रिटेन के कूटनयिकों ने स्थिति को संभालने की बहुत कोशिश की और आख़िरकार तुर्की को एक नया प्रस्ताव भेजा जा सका.

इससे पहले तुर्की के प्रधानमंत्री तैयप एर्दोगान ने स्पष्ट शब्दों में कहा दिया था कि वे बातचीत शुरू करने के लिए "देश के आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे."

उन्होंने कहा, "हमने अपने सिद्धांत पर कायम हैं और आगे भी रहेंगे, यही तुर्की के राष्ट्रीय हित में है और हमारे राजनीतिक मूल्यों के अनुरूप भी है."

ऑस्ट्रिया का रूख़

किसी नए देश को शामिल किए जाने से पहले होने वाली बातचीत का मसौदा बाक़ी सदस्यों की सहमति से तैयार होता है.

ऑस्ट्रिया का कहना था कि पूर्ण सदस्यता के बदले विशेष साझीदार के रूप में बातचीत की जानी चाहिए, ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री उर्सला प्लास्निक ने कहा, "हम अपने देश की जनता की आवाज़ सुनकर ही तुर्की की पूर्ण सदस्यता पर सवाल उठा रहे हैं."

ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री ने कहा था कि उन्हें कोई दबाव में नहीं ला सकता लेकिन ऐसा लग रहा है कि ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ से लंबी बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि वे मान गई हैं.

ऑस्ट्रिया सहित यूरोप के कई देशों तुर्की को पूर्ण सदस्यता देने का विरोध हो रहा है और तुर्की के मुस्लिम बहुल होने को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है.

ब्रिटेन का कहना है कि तुर्की को पूर्ण सदस्य का दर्जा दिए जाने से बहुसांस्कृतिक ब्रिटेन के विचार को बल मिलेगा लेकिन सभी यूरोपीय देश इससे सहमत नहीं दिख रहे हैं.