शनिवार, 01 अक्तूबर, 2005 को 22:36 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ईरान पर सरकार की नीति के बारे में स्पष्टीकरण दिया है.
मनमोहन सिंह ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की बैठक में भारत का वोट ईरान के ख़िलाफ़ नहीं था.
भारत के रुख़ पर सफ़ाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कूटनीति को मामले का हल निकालने का पूरा मौक़ा दिया जाना चाहिए, ऐसा हल जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो.”
पिछले हफ़्ते विएना में आईएईए की बैठक में भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ मत डाला था जिसपर ईरान ने हैरत जताई थी.
वामदलों का विरोध
भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि ये मत ईरान के हित में है.
लेकिन इस फ़ैसले को लेकर सरकार को सहयोगी वामदलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था.
वामदलों का कहना है कि भारत ने अमरीका दबाव में आकर ईरान के ख़िलाफ़ मत डाला है.
सरकार के सहयोगी दल सीपीएम के महासचिव ने एक लेख में कहा है कि प्रधानमंत्री इस फ़ैसले के लिए निजी तौर पर ज़िम्मेदार हैं.
इस टिप्पणी के बारे में सवाल पूछे जाने पर मनमोहन सिंह ने कहा कि मुझे अब किसी बात से हैरत नहीं होती.
उन्होंने गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य निभाते रहना चाहिए.