मंगलवार, 27 सितंबर, 2005 को 09:03 GMT तक के समाचार
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने अपनी सत्तारूढ़ लिकुद पार्टी का आहवान किया है कि वह उनके नेतृत्व में एकजुट हो जाए.
पार्टी के नेतृत्व की लड़ाई में बहुत कम अंतर से जीत हासिल करने के बाद शेरॉन का यह बयान आया है.
उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने लिकुद पार्टी के नेता का चुनाव अप्रैल 2006 के बजाय इस साल नवंबर में कराने के प्रस्ताव पर मतदान कराया था जिसमें शेरॉन को अपने प्रतिद्वंद्वी बेन्यामिन नेतन्याहू से बहुत कम मतों के अंतर से जीत हासिल हुई है.
हालाँकि इस जीत को शेरॉन के लिए कोई बड़ी राहत नहीं माना जा रहा है क्योंकि अप्रैल 2006 में पार्टी के नेता के लिए पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव होगा.
ताज़ा चुनाव को ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने के शेरॉन के फ़ैसले पर जनमतसंग्रह के रूप में देखा जा रहा है.
नेतन्याहू ने कहा है कि शेरॉन ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ हटाने के मामले पर पार्टी के भीतर भारी विरोध की अनदेखी नहीं कर सकते.
लिकुद पार्टी की केंद्रीय समिति के इस मतदान में 51.4 प्रतिशत सदस्यों ने निर्धारित समय से पूर्व चुनाव कराने का विरोध किया, जबकि 47.7 प्रतिशत ने चुनाव नवंबर में कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया.
तेल अवीव से बीबीसी संवाददाता के अनुसार 3000 सदस्यीय लिकुद केंद्रीय समिति में बहुमत शेरॉन के पक्ष में होने का ये मतलब निकाला जा सकता है कि पार्टीजनों को आम इसराइलियों के बीच शेरॉन की लोकप्रियता पर भरोसा है.
ज़्यादातर लिकुद पार्टी सदस्यों को शेरॉन से अगले साल आम चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने की उम्मीद है.
नेतन्याहू की चुनौती
ताज़ा मतदान को ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी की शेरॉन की कार्रवाई पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था.
शेरॉन को चुनौती देने वालों में सर्वप्रमुख हैं पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व लिकुद नेता बिन्यामिन नेतन्याहू.
उल्लेखनीय है कि नेतन्याहू ने ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी का खुल कर विरोध किया था.
उनका आरोप था कि ग़ज़ा पट्टी को चरमपंथियों के हाथों में छोड़ दिया गया है.
सोमवार को मिली जीत के बाद माना जाता है कि शेरॉन अब पार्टी के भीतर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.