गुरुवार, 22 सितंबर, 2005 को 12:45 GMT तक के समाचार
इराक़ी शहर बसरा के गवर्नर मोहम्मद अल वैली ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन ब्रितानी सैनिकों के साथ उस समय तक सहयोग नहीं करेगा जब तक वे सोमवार की घटना के लिए माफ़ी नहीं मांगते.
ब्रितानी सैनिकों का दावा है कि उन्होंने अपने विशेष दस्ते (एसएएस) के दो सैनिकों को शिया चरमपंथियों के क़ब्ज़े से छुड़ाया जिन्हें पहले इराक़ी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था.
ब्रितानी सैनिकों ने अपनी कार्रवाई के क्रम में पहले बसरा स्थित एक जेल पर छापा मारा था. बसरा के गवर्नर का कहना है कि ब्रिटेन इस घटना के लिए माफ़ी मांगे और नुक़सान की भरपाई के लिए मुआवज़ा दे.
गवर्नर ने कहा कि ब्रितानी सैनिक इसकी गारंटी लें कि ऐसा फिर नहीं होगा. उन्होंने कहा, "स्थानीय शासकीय परिषद ने बैठक में यह फ़ैसला किया है कि वे तब तक ब्रितानी सैनिकों के साथ सहयोग नहीं करेंगे जब तक वे हमारी तीनों मांगे नहीं मान लेते."
स्थानीय प्रशासन की तीन मांगे हैं- ब्रितानी सैनिक घटना के लिए माफ़ी मांगें, वे गारंटी लें कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी और कार्रवाई के दौरान हुए नुक़सान की भरपाई के लिए मुआवज़ा दें.
स्पष्टीकरण
दूसरी ओर ब्रिटेन ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि इराक़ी पुलिस में मौजूद 'दुष्ट तत्त्वों ' ने दोनों सैनिकों को चरमपंथियों के हवाले कर दिया था.
लेकिन इराक़ी अधिकारियों ने ब्रितानी सैनिकों के दावे को ग़लत बताया है. उनका कहना है कि गिरफ़्तार ब्रितानी सैनिक इराक़ी पुलिस के ही हिरासत में थे.
उस घटना के बाद से बसरा के सड़कों पर ब्रितानी सैनिकों की मौजूदगी कम हो गई है. लगातार दूसरे दिन ब्रितानी सैनिक इराक़ी पुलिसकर्मियों के साथ गश्त करते नहीं देखे गए.
बसरा के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को अपनी कार्रवाई के दौरान ब्रितानी सैनिकों ने दो इराक़ी पुलिसवालों को मार दिया.
सोमवार को ही ब्रितानी सैनिकों की बख़्तरबंद गाड़ियों पर पेट्रोल बम से भी हमले हुए. कई ब्रितानी सैनिकों को अपनी जलती बख़्तरबंद गाड़ी छोड़कर भागना पड़ा. इस घटना के बाद बसरा में ब्रितानी पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी हैं.
हालाँकि बुधवार को ब्रितानी रक्षा मंत्री जॉन रीड और इराक़ी प्रधानमंत्री इब्राहिम अल जाफ़री ने मुलाक़ात के बाद भरोसा दिया कि इस घटना से दोनों देशों के रिश्तों पर असर नहीं पड़ा है.