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बुधवार, 21 सितंबर, 2005 को 08:41 GMT तक के समाचार

भारत-अमरीका बातचीत में ईरान छाया

भारत का कहना है कि ईरान के परमाणु मामले पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कूटनीतिक प्रयास किए जाने चाहिए.

अमरीका में भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलिज़ा राइस को भारत के इन विचारों से अवगत कराया.

एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई 45 मिनट की बातचीत के बाद पत्रकारों को बताया कि मुलाक़ात 'सौहार्दपूर्ण वातावरण' में हुई.

नटवर सिंह और कॉन्डोलिज़ा राइस की मुलाक़ात ऐसे समय हुई है जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा काफ़ी गर्म है, पिछले सप्ताह भारतीय प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच हुई बातचीत में भी ईरान का मसला उठा था.

हालाँकि भारतीय प्रधानमंत्री स्पष्ट शब्दों में कह चुके हैं कि "भारत अपने पड़ोस में एक परमाणु शक्ति नहीं चाहता" लेकिन साथ ही भारत इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि मसले का हल कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए निकाला जाना चाहिए.

गतिविधियाँ

ईरान के मामले पर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं, रूस और चीन ने कहा है कि वे इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के हामी नहीं है जबकि अमरीका और तीन प्रमुख यूरोपीय देश ऐसा करना चाहते हैं.

रूसी विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत के विदेश मंत्री के साथ उनकी न्यूयॉर्क में पिछले सप्ताह बातचीत हुई थी और चीन की ही तरह भारत भी ऐसा ही सोचता है.

भारत का कहना है कि ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए जबकि कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए समस्या के हल के प्रयास होने चाहिए.

अमरीकी विदेश मंत्री से मुलाक़ात से पहले नवटर सिंह ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि ईरान का परमाणु मसला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के ज़रिए हल हो सकता है.

राइस और नटवर सिंह की बातचीत में ईरान के अलावा कई अन्य क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि जिस तरह छह देशों को गुट ने कूटनीति के ज़रिए उत्तर कोरिया के परमाणु मामले का हल निकाला है, उसी तरह ईरान मसले का हल भी निकल सकता है.