सोमवार, 19 सितंबर, 2005 को 17:31 GMT तक के समाचार
बीबीसी से अलग अलग बातचीत में कुछ राजनेताओं ने बताया कि उनकी दुनिया कौन चलाता है.
शरद पवार ( राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता और कृषि मंत्री)
चालीस साल राजनीति में रहने के बाद अपनी कोई दुनिया नहीं रह जाती है. अपनी दुनिया क्या है लोग हैं. लोगों के कहने पर हम चलते हैं. काम करते हैं.
लोग ही मेरी दुनिया चलाते हैं. हम जो भी करते हैं वो लोगों से जुड़ा होता है. हमारे मतदाताओं से जुड़ा होता है. ये सब जो दिया लोगों ने दिया. हमारा जीवन ही पूरा लोगों के लिए हो गया है.
जनता ही हमें प्रेरित करती हैं. विश्वास देती हैं और संकट हो तो जनता ही आशीर्वाद भी देती हैं.
मेरी प्रेरणा जनता ही है और मेरी दुनिया भी उन्हीं से है.
उमा भारती ( वरिष्ठ भाजपा नेता )
मुझे अपने जीवन में चार लोगों से प्रेरणा मिली है और मेरी दुनिया इन्हीं से चलती है.
पौराणिक चरित्र में हनुमान जी से, इतिहास में शिवाजी से, आधुनिक काल में चे ग्वेरा से और अपनी माँ. ये चारों ही मुझे प्रेरित करते हैं. ईश्वर की भक्ति तो सिर्फ आनंद प्राप्ति के लिए करती हूं.
हनुमान जी से मैंने सीखा है सेवा भाव. किस तरह बिना फल की चिंता किए सेवा में लगे रहा जा सकता है.
शिवाजी से सीखा कि किस तरह उन्होंने अपने अहं को मुख्य नहीं माना और जीत को ही लक्ष्य बनाए रखा. इसके लिए औरंगज़ेब के दरबार में जाना पड़ा तो वहां भी चले गए.
चे ग्वेरा से यह सीखा कि कैसे सत्ता सुख में नहीं पड़ना चाहिए.क्यूबा में विजय मिली तो वो रुके नहीं. पड़ोस के देशों में गए और वहां काम करते रहे. चे चाहते तो मंत्री बन कर सुखी रहते और शायत फिदेल कास्त्रो के लिए चुनौती बन सकते थे. उन्होंने काम करना जारी रखा और पुलिस की गोली का शिकार हुए. उनसे सतत संघर्ष सीखा.
अपनी माँ से जाना कि ज़िदगी में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ उनसे भयभीत नहीं होना चाहिए.
सचिन पायलट ( युवा कांग्रेस नेता)
मेरी दुनिया......कौन चलाता है. हर इंसान की दुनिया में कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें वह अपने तक ही सीमित रखता है.
जहां तक मेरी बात है. मेरी अंतरात्मा की आवाज़, मेरा भगवान, मेरा इतिहास मेरे संस्कार. जो मैने अपने माता पिता और परिवार से सीखा और जो मेरी परंपराएं हैं उनके आधार पर मेरी दुनिया चलती है.
मैं जो भी करता हूं उस पर इन सभी बातों का असर होता है. कोई ऐसा व्यक्ति या कोई ऐसी शक्ति नहीं है जो इस बात को तय करे कि मैं क्या करता हूं कैसे करता हूं.
निश्चित रुप से कुछ बंदिशें होती हैं समाज में उन्हें देखते हुए मुझे जो अपने मन में सही लगता है सच लगता है उन्हीं नियम क़ानून मेरी ज़िदगी मेरी दुनिया चलाते हैं.
राजनीति में हूं तो ज़िम्मेदारी थोड़ी अधिक हो जाती है लेकिन आदमी दुनिया में अकेला आता है और अकेला जाता है.
आपके मन में क्या होता है वो दुनिया नहीं जान पाती. वो जो हम कहते हैं वही दुनिया सुनती है. वही देखती है जो हम दिखाना चाहते हैं. आपके व्यक्तित्व को देखती है तो हम जो भी करते हैं जैसी भी हमारी दुनिया चलती हो इसका ध्यान रखना होता है.