सोमवार, 05 सितंबर, 2005 को 10:58 GMT तक के समाचार
चीनी कपड़ों के निर्यात को लेकर चीन और यूरोपीय संघ के बीच चले रहे विवाद पर समझौता हो गया है.
उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद ये विवाद सुलझ जाएगा.
इस समझौते के मुताबिक़ सात करोड़ पचास लाख चीनी कपड़ों को बंदरगाहों से भेजने की अनुमति दी जाएगी लेकिन इन कपड़ों के पचास फ़ीसदी कोटे को अगले साल के कोटे में से काट लिया जाएगा.
अगर इस समझौते को यूरोपीय संघ के सभी सदस्य मंज़ूरी दे देते हैं तो बंदरगाहों पर अटके हुए चीनी सामान को छोड़ दिया जाएगा.
लेकिन यूरोपीय संघ के सभी 25 देशों के बीच इस समस्या के लेकर आपस में ही मतभेद हैं.
फ़्रांस, स्पेन,इटली और पुर्तगाल चीन से ज़्यादा सामान मंगवाए जाने के ख़िलाफ़ हैं. जबकि जर्मनी और स्वीडन जैसे देश इसके पक्ष में हैं.
शिखरवार्ता
इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ के बीच शिखर वार्ता शुरू हो गई है. इस वक़्त यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है.
टोनी ब्लेयर ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है. उनका कहना था मुश्किल ये है कि हमें कई पक्षों के हितों का ध्यान रखना पड़ रहा है.
यूरोपीय उत्पादकों का डर है कि चीनी कपड़ों के चलते उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा जबिक रिटेलरों का कहना है कि ये मुद्दा नहीं सुलझा तो दुकानों में सामान की कमी हो जाएगी.
इस मुद्दे को लेकर चीन और अमरीका में भी विवाद चल रहा है.
अमरीका के साथ चीन का कोई समझौता नहीं हो पाया है जिसके बाद माँग उठ रही है कि अमरीका अपने कोटा ख़ुद ही तय कर ले.
डब्लूटीओ यानि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत इसकी अनुमति दी गई है. चीन 2001 में डब्लूटीओ का सदस्य बना था.