बुधवार, 31 अगस्त, 2005 को 07:22 GMT तक के समाचार
इंडोनेशिया की सरकार ने 200 से ज़्यादा आचे विद्रोहियों को जेल से रिहा कर दिया है. आचे विद्रोहियों और सरकार के बीच हुए समझौते के तहत ये रिहाई हुई है.
इस समझौते के साथ ही क़रीब तीन दशक से आचे प्रांत में चल रहा संघर्ष समाप्त हो गया था. मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसीलो बम्बांग युधोयोनो ने विद्रोहियों को क्षमादान देने की घोषणा की थी.
इस घोषणा के तहत फ़्री आचे मूवमेंट (जीएएम) के क़रीब 1400 सदस्यों की रिहाई होनी है. लेकिन सामान्य आपराधिक गतिविधियों के दोषी लोग, जिनका संबंध अलगाववादी आंदोलन से नहीं है, उन्हें जेल में ही रहना होगा.
राष्ट्रपति की इस घोषणा के बाद ये भी उम्मीद जताई जा रही है कि देश छोड़कर चले गए फ़्री आचे मूवमेंट के अधिकारी इंडोनेशिया लौट आएँगे.
पिछले साल दिसंबर में सूनामी लहरों की विनाशलीला में आचे प्रांत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था. उसके बाद से ही सरकार और विद्रोहियों ने शांति की नयी पहल करनी शुरू कर दी थी.
महत्वपूर्ण
जानकारों का कहना है कि सरकार की इस नयी पहल को शांति की दिशा में काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. लेकिन रास्ते में कई अवरोध भी हैं.
बुधवार को जिन लोगों की रिहाई हुई है, उनमें फ़्री आचे आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य तेन्गुक कमारुज़ा, अमनी बिन अहमद मरज़ुकी, नशीरुद्दीन बिन अहमद और मुहम्मद उस्मान बिन लाम्पो अवे शामिल हैं.
ये चारो वर्ष 2003 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किए गए थे. जकार्ता स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोहियों की रिहाई का मामला पहले ही विवादों में घिर गया है.
क्योंकि कुछ सांसद विद्रोहियों से अपील कर रहे हैं कि वे रिहाई से पहले इंडोशेनिया के प्रति अपनी वफ़ादारी का शपथ लें.
लेकिन फ़्री आचे मूवमेंट से जुड़े लोगों ने इसे इनकार कर दिया है और कहा है कि समझौते में यह स्पष्ट लिखा गया है कि रिहाई बिना किसी शर्त के होगी.
सरकार और फ़्री आचे मूवमेंट के बीच हुए समझौते के तहत सरकार ने रिहाई की बात मानी और बदले में विद्रोहियों ने अपने हथियार डालने की बात स्वीकार की थी.