शनिवार, 27 अगस्त, 2005 को 16:55 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने देशवासियों से अपील की है कि वे इराक़ की स्थिति को लेकर संयम बरतें. उन्होंने कहा कि भविष्य में और बलिदान देना पड़ सकता है.
अपने साप्ताहिक रेडियो संबोधन में राष्ट्रपति बुश ने कहा, "इराक़ और बाक़ी मध्य पूर्व में हमारी कोशिशों में और समय लग सकता है. इसमें हमें और बलिदान देने की ज़रूरत पड़ेगी. साथ में हमें अपना संकल्प भी जारी रखना होगा."
इराक़ में अमरीका की कार्रवाई शुरू होने के बाद से अभी तक क़रीब 1900 अमरीकी सैनिक मारे जा चुके हैं और राष्ट्रपति बुश पर इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि वे सैनिकों को वहाँ से वापस बुला लें.
इराक़ के नए संविधान को अमरीका काफ़ी महत्वपूर्ण मानता है और इसे इराक़ की स्थिरता के लिए भी ज़रूरी मानता है और सैनिकों की वापसी की बात भी कुछ हद तक इससे जुड़ी हुई है.
लेकिन इराक़ के नए संविधान पर मतभेद क़ायम हैं और अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय इससे काफ़ी नाराज़ हैं.
राष्ट्रपति बुश ने अपने संबोधन में कहा, "दो सौ साल पहले हमारे देश के संस्थापकों ने भी कठिन मुद्दों का सामना किया था, आज इराक़ी भी संघीय व्यवस्था जैसे मुद्दे पर उसी तरह जूझ रहे हैं. लेकिन महत्वपूर्ण ये है कि इराक़ी इन मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं."
समर्थन
उन्होंने कहा कि अमरीका इस दौर में इराक़ का समर्थन करना जारी रखेगा. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि इराक़ी एक स्वतंत्र देश के गठन के लिए मिल-जुल कर काम कर रहे हैं, जिससे इलाक़े में स्थिरता और शांति आएगी.
उन्होंने कहा कि अमरीका इस दिशा में इराक़ की सहायता करेगा. राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी जनता को ये याद दिलाया कि उनका मानना है कि अमरीका की सुरक्षा के लिए इराक़ में कार्रवाई ज़रूरी थी.
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में स्वतंत्रता की पहल करके लाखों लोगों को उम्मीद की किरण दिखा रहे हैं और अपने नागरिकों की सुरक्षा का भी ख़्याल रख रहे हैं.
राष्ट्रपति बुश ने ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से यहूदी बस्तियों को हटाए जाने का भी स्वागत किया.
उन्होंने कहा, "लोग भविष्य की सुरक्षा के बारे में सोचकर कड़े विकल्प भी अपना रहे हैं. लोगों को ये भी उम्मीद है कि इससे इलाक़े में और दुनियाभर में शांति व्यवस्था क़ायम होगी."
उन्होंने कहा कि अब गेंद फ़लस्तीनियों के पाले में है जिन्हें चरमपंथियों पर कार्रवाई करनी चाहिए.
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि फ़लस्तीनियों को अब दुनिया को ये दिखाना है कि वे आतंकवाद से संघर्ष कर सकते हैं और शांतिपूर्ण तरीक़े से शासन कर सकते हैं.