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सोमवार, 22 अगस्त, 2005 को 18:43 GMT तक के समाचार

ई शाहिद
दुबई से

अब आया है ऊँट रोबोट के नीचे

दुनिया भर में बच्चों के शोषण का जीवंत प्रतीक बन चुकी दुबई में ऊँटों की मशहूर दौड़ अब नए दौर में प्रवेश कर रही है.

पंद्रह किलो वज़न वाले एक रोबोट का ट्रायल पिछले दिनों पूरा हो गया है, यह रोबोट किसी आम सवार की ही तरह ऊँट की लगाम अपने बाएँ हाथ में और चाबुक दाएँ हाथ में जकड़कर रखता है.

मानवाधिकार संगठनों की कड़ी आलोचना के बाद कुछ समय पहले घोषणा की गई थी कि ऊँटों की दौड़ में अब बच्चों की जगह रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा.

कुछ महीनों के इंतज़ार के बाद रोबोट तैयार है जो ऊँटों को दौड़ाएगा, इस तरह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दुनिया का पहला देश बन गया है जो ऊँटों की दौड़ में रोबोट का इस्तेमाल करेगा.

खाड़ी के कई देशों में ऊँटों की दौड़ बहुत लोकप्रिय है और इन दौड़ों में ग़रीब देशों से लाए गए छोटे बच्चों को ऊँटों पर बैठाया जाता है, इस ख़तरनाक खेल में कई बच्चे अपनी जान तक गँवा चुके हैं.

इस रोबोट को तैयार किया है संयुक्त अरब अमीरात के ही सालिम अंसारी ने.

अंसारी कहते हैं, "मुझे इस रोबोट को डिज़ाइन करने में पाँच महीने लगे, सबसे मुश्किल काम ऊँट की चाल के हिसाब से रोबोट को ढालना था."

सबसे दिलचस्प बात है इस रोबोट का रिमोट कंट्रोल जिसके ज़रिए ऊँट की रफ़्तार और उसकी दिशा पर नियंत्रण रखा जा सकता है.

कई दशकों से ऊँट की दौड़ में छोटे बच्चों को सवार की जगह बैठा देखने के आदी हो चुके लोग रोबोट को किस तरह देखते हैं, यह दौड़ शुरू होने के बाद ही पता चलेगा.

बहरहाल, संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने घोषणा कर दी है कि किसी भी दौड़ में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

हाल ही में यूएई की सरकार ने लगभग 250 ऐसे बच्चों को उनके देश वापस भेजा है जिन्हें ऊँटों की दौड़ के लिए भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लाया गया था.