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बुधवार, 04 जनवरी, 2006 को 23:43 GMT तक के समाचार

अरियल शेरॉनः व्यक्तित्व परिचय

इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन वर्ष 2006 की शुरूआत से ही गंभीर रुप से बीमार पड़े हुए हैं और जनवरी से कोमा में है. माना जा रहा है कि राजनीतिक रूप से अब वे सक्रिय नहीं रह पाएँगे.

उनके बारे में कहा जाता है कि अरियल शेरॉन मोटी चमड़ी के आदमी हैं यानी उन्हें इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं कि उन्हें कौन पसंद या नापंसद कर रहा है.

चाहे वो अरब हो या फिर इसराइली. इसराइली सेना में उच्च पद पर रहे 77 साल के राजनेता का सिर्फ़ एक ही मक़सद रहा है- अपनी शर्तों पर इसराइल को पूरी सुरक्षा मुहैया कराना.

अरियल शेरॉन एक कुशल राजनेता हैं इसका पता इस बात से लग गया जब उन्होंने गज़ा पट्टी को ख़ाली करने की अपनी योजना को संसद और मंत्रिमंडल की मंज़ूरी दिलाई.

अरियल शेरॉन अपने प्रधानमंत्रित्वकाल में दक्षिणपंथी और कट्टरपंथी जैसे विशेषणों के साथ पुकारे जाते थे.

लेकिन राजनैतिक विरोध के बावजूद गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटाने के फ़ैसला करके उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया.

सेना में नौकरी

अरियल शेरॉन का जन्म फ़लस्तीन में 1928 में हुआ था. उस वक़्त फ़लस्तीन पर ब्रिटेन का अधिकार था.

जवानी में वह यहूदियों के भूमिगत सैनिक संगठन हगानाह में शामिल हो गए. यहूदी देश इसराइल बनने के बाद उन्होंने 1948-49 में अरब-इसराइल युद्ध में हिस्सा लिया.

1950 में उन्होंने ग़ज़ा पट्टी में तैनात मिस्र की सेना के ख़िलाफ़ कई सैनिक अभियानों में हिस्सा लिया.

अरियल शेरॉन ने सेना में ब्रिगेडियर जनरल तक का रास्ता आसानी से तय किया.

1967 में छह दिन तक चले युद्ध में उन्होंने इसराइली सेना के एक डिवीज़न की अगुवाई की.

इस युद्ध में इसराइल ने पूर्वी यरूशलम, पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी पर कब्ज़ा किया था.

उस वक़्त उन्होंने इसराइली कब्ज़े को बनाए रखने के लिए जो तरीक़े इस्तेमाल किए उसके बाद से ही फ़लस्तीनी लोगों को ये एहसास हो गया था कि वे उनके सबसे बड़े दुश्मन हैं.

अरियल शेरॉन 1977 में पहली बार संसद के लिए चुने गए. 1982 में लेबनान पर हुए इसराइली हमले के पीछे उन्हीं का दिमाग था.

इस हमले में बेरूत में इसराइली नियंत्रण वाले दो शरणार्थी शिविरों में सैंकड़ों फ़लस्तीनियों की हत्या कर दी गई थी.

इस हमले की जांच करने वाले एक ट्राइब्यूनल ने 1983 में अरियल शेरॉन को रक्षा मंत्री के पद से हटा दिया.

इस ट्राइब्यूनल ने पाया कि हत्याओं के लिए अरियल शेरॉन परोक्ष रुप से ज़िम्मेदार थे.

राजनीति

कई राजनेताओं पर इस तरह के आरोप साबित होने का मतलब होता है उनके राजनीतिक जीवन की समाप्ति.

लेकिन अरियल शेरॉन दक्षिणपंथी गुट में प्रसिद्ध रहे. उन्हें लगा कि बस उन्हें अपना धीरज नहीं खोना चाहिए और समय एक बार फिर उनका होगा.

1990 की शुरुआत में उन्होंने आवास मंत्री की हैसियत से पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी में बड़े पैमाने पर यहूदी बस्तियाँ बसाने की मुहिम सफलतापूर्वक चलाई.

और अब वक़्त इतना बदल गया है कि शेरॉन ने इन्हीं बस्तियों को हटवाया, उन्होंने इसराइली सैनिकों को अधिकार दिए कि जो लोग वहाँ से हटने को तैयार नहीं हों उन्हें जबरन हटा दिया जाए.

शेरॉन ने कहा यह बहुत ही दुखदायी प्रक्रिया है लेकिन इसराइल के लिए ज़रूरी है.

गज़ा पट्टी से वापसी की शेरॉन की योजना को लेकर उनकी लिकुद पार्टी में भारी असंतोष पैदा हो गया और स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि शेरॉन को पार्टी से ही अलग होना पड़ा.

अरियल शेरॉन ने अपने सहयोगियों को साथ लेकर अपनी अलग पार्टी, कदिमा, का गठन किया.

ऐसा माना जा रहा है कि कदिमा पार्टी में विभिन्न मतों वाले राजनेता एक साथ हो गए हैं.

अरियल शेरॉन की ग़ैर मौजूदगी में इसराइल के संसदीय चुनाव में कदिमा पार्टी का नेतृत्व एहुद ओल्मर्ट कर रहे हैं.