बुधवार, 17 अगस्त, 2005 को 22:35 GMT तक के समाचार
ग़ज़ा पट्टी से इसराइलियों को निकालने की कार्रवाई के दूसरे दिन इसराइली सैनिक कट्टर यहूदियों की एक बस्ती में प्रवेश कर गए हैं.
कफ़ार दारोम नामक इस बस्ती में 2,000 से ज़्यादा कट्टरपंथी यहूदियों के होने की संभावना है. सैनिकों को इस बस्ती को खाली कराने में कड़े प्रतिरोध की आशंका है.
इससे पहले इसराइली अधिकारियों ने कहा कि ग़ज़ा पट्टी की यहूदी बस्तियों में से एक चौथाई को कार्रवाई के पहले ही दिन बुधवार को खाली कराया जा चुका है.
इसराइली सैनिक घरों, स्कूलों और यहूदी उपासना स्थलों से सैंकड़ो लोगों को जबरन निकाल कर बसों पर इलाक़े से बाहर ले गए.
बलपूर्वक बस्तियों से निकाले गए अनेक यहूदी रोते देखे गए.
सेना की कार्रवाई के पहले दिन बुधवार को हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई. हलाँकि कई जगह युवाओं ने ग़ज़ा में 38 वर्षो से जमी रिहाइश उजाड़े जाने का जमकर विरोध किया.
'सुरक्षा स्थिति सुधरेगी'
इस बीच इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि बस्तियाँ खाली कराए जाने के द्रवित करने वाले दृश्यों के बावजूद ग़ज़ा पट्टी खाली करने के इसराइल के फ़ैसले से सुरक्षा स्थिति में सुधार होगा.
![]() सैनिकों को लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा |
इसराइली सेना ने भरोसा व्यक्त किया है कि गज़ा पट्टी से बचे हुए यहूदी बाशिंदों को बाहर निकालने का काम अगले कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा.
पहले अनुमान लगाया गया था कि इस काम में छह सप्ताह लगेंगे लेकिन अब कहा जा रहा है कि छह दिन में ही बस्तियाँ खाली हो जाएँगी.
गज़ा पट्टी से बाहर निकलने की समय सीमा मंगलवार आधी रात को ख़त्म हो गई, उसके बाद से यहूदी बाशिंदों को इसराइली सुरक्षा बल बाहर निकालने के काम में जुटे हैं.
गज़ा पट्टी छोड़ने वाले यहूदियों को काफ़ी मोटा मुआवज़ा दिया जा रहा है और सरकार ने उन्हें नई जगह पर बसने में पूरी मदद का भी आश्वासन दिया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एक औसत परिवार को लगभग चार लाख डॉलर तक का मुआवज़ा मिल सकता है जो कि एक आम इसराइली परिवार के लिए एक बड़ी रक़म है.