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इराक़ी संविधान की समय सीमा बढ़ी

इराक़ में संसद ने नए संविधान के बारे में शिया, सुन्नी और कुर्द समुदायों के बीच कोई समझौता कराने के लिए इन समुदायों के वार्ताकारों को एक और सप्ताह का समय दिया है.

नए संविधान को सोमवार को संसद में इसे पेश किए जाने की समय सीमा ख़त्म होने से कुछ ही मिनट पहले वार्ताकारों के लिए एक सप्ताह का समय बढ़ाया गया.

इससे पहले सोमवार को पूरा दिन संविधान पर सहमति बनाने के लिए प्रयास होते रहे और बातचीत का दौर चलता रहा. संसद ने मतदान करके वार्ताकारों को एक सप्ताह का समय बढ़ाया.

संसद के स्पीकर ने कहा कि समस्या का हल ढूंढने और हर किसी को संतुष्ट करने के लिए ज़ोरदार प्रयास किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि वार्ताकार एक ऐसा संविधान तैयार करना चाहते हैं जो "देश की एकता बनाए रखेगा और आने वाली पीढ़ियों को मदद मिलेगी."

संवाददाताओं का कहना है कि समझौते में एक बाधा ये है कि कुर्दों की ये माँग है कि इराक़ को एक संघीय शासनात्मक ढाँचा बनाया जाए लेकिन सुन्नी नेता इसका विरोध कर रहे हैं.

मतभेद और प्रयास

सुन्नी नेताओं का कहना है कि वे इराक़ के संघीय ढाँचे के पक्ष में नहीं हैं, और वे चाहते हैं कि फ़िलहाल इस मामले को छोड़कर बाक़ी मुद्दों पर सहमति बनाई जाए.

ऐसे संकेत भी आए हैं कि सुन्नियों के समर्थन के बिना भी संसद में ऐसा मसौदा पेश किया जा सकता है जो शिया और कुर्द समुदाय को मंज़ूर हो.

शिया और कुर्द समुदाय के पास संसद में बहुमत है जिससे संविधान का मसौदा पारित हो सकता है.

लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इस क़दम से अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय और अलग-थलग पड़ जाएगा और जनमत संग्रह के समय मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.

सुन्नी नेता सलेह मुतलाक़ ने कहा कि अगर मसौदे में संघीय इराक़ की बात हुई तो वे इसे नहीं मानेंगे.

उन्होंने एएफ़पी एजेंसी को बताया कि सुन्नियों ने कहा है कि इस मुद्दे को अगली नेशनल असेंबली के लिए छोड़ देना चाहिए.

दक्षिण इराक़ में स्वायत्त इलाक़ा बनाए जाने की शिया नेता अब्दुल अज़ीज़ अल हाकिम की बात को लेकर भी सुन्नी मुसलमान नाराज़ हैं.

लेकिन कुर्द और शिया सदस्य इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि इराक़ को संघीय गणराज्य या इस्लामी न कहा जाए और देश का आधिकारिक नाम इराक़ी गणराज्य हो.

इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालाबानी ने रविवार को कहा था कि संविधान का मसौदा समय पर तैयार हो जाएगा.

इस बीच इराक़ के तेल मंत्री ने कहा है कि संविधान में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि तेल से मिलने वाली आय का सही बँटवारा हो.