बुधवार, 10 अगस्त, 2005 को 01:30 GMT तक के समाचार
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ग्यारह सितंबर के हमलों से एक वर्ष पहले ही इसके लिए ज़िम्मेदार चार लोगों की पहचान अल क़ायदा के चरमपंथियों के रूप में कर ली थी.
लेकिन जिस ख़ुफ़िया इकाई ने इन लोगों की पहचान की थी उसकी बात केंद्रीय जाँच संस्था एफ़बीआई तक नहीं पहुँचाई गई.
यह नई जानकारी अमरीकी संसद के एक सदस्य कर्ट वेल्डन ने सामने रखी है.
जिन चार लोगों की पहचान अल क़ायदा चरमपंथियों के रूप में की गई थी उनमें मोहम्मद अता को भी शामिल बताया जाता है जो ग्यारह सितंबर के हमलों का सरगना था.
कर्ट वेल्डन के इस बयान को इसलिए वज़न दिया जा रहा है क्योंकि एक अनाम खुफ़िया अधिकारी ने भी एक प्रतिष्ठित अमरीकी अख़बार से ऐसी ही बातें कही हैं.
ख़ुफ़िया अभियान
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अनाम ख़ुफ़िया अधिकारी के हवाले से कहा है कि ऑपरेशन 'एबल डेंजर' नाम का एक अभियान अमरीकी सेना के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने शुरू किया था.
इस अधिकारी ने बताया कि इस अभियान का मक़सद नीति निर्धारकों को अल क़ायदा के चरमपंथियों से निबटने के विकल्प सुझाना था.
लेकिन अमरीकी सेना के अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है कि 'एबल डेंजर' नाम का कोई अभियान वाक़ई था.
कर्ट वेल्डन की बात चाहे जिस हद तक सही या ग़लत हो लेकिन इतना ज़रूर है कि इस बयान से ग्यारह सितंबर के हमलों को रोकने में ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी पर सवाल तो खड़े होंगे ही.
कर्ट वेल्डन इस मामले पर संसद में और पत्रकारों से भी बातचीत कर चुके हैं. उनका कहना है कि इस ख़ुफ़िया इकाई ने इन चारों लोगों की वीज़ा की तस्वीरें भी जुटाईं और स्पेशल ऑपरेशंस कमांड से अनुरोध किया कि इसकी सूचना एफ़बीआई को दी जाए.
लेकिन ऐसा नहीं किया गया, इसकी एक वजह यह भी बताई गई कि इनका वीज़ा वैध है इसलिए ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है.