रविवार, 07 अगस्त, 2005 को 03:43 GMT तक के समाचार
रूस में बचाव दल ने एक छोटी नौसैनिक पनडुब्बी को समुद्र तल से बाहर निकाल लिया है और इसमें फँसे सातों नौसैनिक जीवित बाहर निकल आए हैं.
आशंका व्यक्त की जा रही थी कि अगर उन्हें जल्दी ही बाहर नहीं निकाला गया तो उनका दम घुट जाएगा क्योंकि उनके पास बहुत कम समय के लिए ऑक्सीजन बची थी.
छह डिग्री सेल्सियस तापमान में रहे इन नौसैनिकों का इलाज करने के लिए डॉक्टर मौजूद थे.
बताया गया है कि ब्रितानी विशेषज्ञों ने रूसी पनडुब्बी को बाहर निकालने के लिए उन तारों को काट दिया जिनमें वह उलझ गई थी. 13 मीटर लंबी रूसी पनडुब्बी प्रित्ज़ के मुक्त होने के बाद धीरे-धीरे सतह पर आ गई.
ब्रिटेन की भूमिका
रूसी अधिकारियों ने इस अभियान में सहायता देने के लिए ब्रितानी टीम का धन्यवाद दिया.
समुद्र तल पर पड़ी पनडुब्बी को बाहर निकालने के काम में एक ब्रितानी रोबोटिक पनडुब्बी स्कॉरपियो लगाई गई थी.पनडुब्बी को निकालने के रूसी नौसेना के प्रयास नाकाम रहे थे.
पहले बताया गया था कि पनडुब्बी मछली पकड़ने के जाल में उलझ गई है लेकिन बाद में पता चला कि ये तार समुद्र तल में होने वाली गतिविधियों की सूचना देने के लिए लगाए गए थे.
एक नौसैनिक की पत्नी ने सबके सुरक्षिक होने की सुनने के बाद कहा कि वो खुशी के मारे नाचने लगीं.
पनडुब्बी भारतीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 56 मिनट पर बाहर आई.
पुतिन की चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चुप्पी साधे रहे.
लेकिन उनके कार्यालय का कहना है कि उन्होंने रक्षा मंत्री को मामले के जाँच के आदेश दिए हैं. हालांकि राष्ट्रपति पुतिन अब तक सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए.
प्रित्ज़ को बाहर निकालने की चार दिनों से जारी कोशिशों ने लोगों के दिमाग़ में कुर्क्स हादसे की याद ताज़ा कर दी है.
पाँच वर्ष पहले कुर्क्स नाम की रूसी पनडुब्बी के डूब जाने से 118 नौसैनिक मारे गए थे.