गुरुवार, 04 अगस्त, 2005 को 22:47 GMT तक के समाचार
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि अल क़ायदा से मिली धमकियों की वजह से अमरीकी सैनिक इराक़ या मध्य पूर्व से बाहर नहीं निकलेंगे और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ युद्ध जारी रहेगा.
जॉर्ज बुश ने अरबी टेलीविज़न चैनल अल जज़ीरा पर दिखाए गए एक वीडियो संदेश की प्रतिक्रिया में यह बात कही है.
अलक़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन का दाहिना हाथ माने जाने वाले अयमन अल ज़वाहिरी ने इस वीडियो संदेश में चेतावनी दी कि अगर अमरीका और उसके सहयोगी देश मुस्लिम देशों से अपने सैनिक नहीं हटाते हैं तो लंदन जैसे और हमले हो सकते हैं.
सुरक्षा मामलों के बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अल ज़वाहिरी के संदेश में लंदन बम धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली गई है और ऐसा लगता है कि अल क़ायदा दूसरों की कार्रवाई का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है.
जॉर्ज बुश ने कहा कि ज़वाहिरी की टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि इराक़ आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध का एक हिस्सा रहा है.
इराक़ में एक दिन पहले मारे गए 14 अमरीकी सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए बुश ने कहा कि अमरीका इराक़ में आतंकवादियों को हरा रहा है ताकि उनका ख़तरा देश के अंदर ना हो.
जॉर्ज बुश ने कहा है कि ज़वाहिरी जैसे लोगों की विचारधारा अंधेरेवाली और पिछड़ेपन की है और उनका मक़सद अमरीका को व्यापक मध्य पूर्व से बाहर निकलना है मगर अमरीका और उसके सहयोगी देश इराक़ में अपना मिशन पूरा करेंगे.
ब्रिटेन सरकार की तरफ़ से इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
अरब सैटेलाइट टेलीविज़न अल जज़ीरा पर दिखाए गए एक वीडियो टेप में ज़वाहिरी ने कहा कि लंदन में अगर और बम धमाके होते हैं तो उसकी ज़िम्मेदारी ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की विदेश नीति पर होगी.
ज़वाहिरी ने कहा, "ब्लेयर मध्य लंदन में आपके लिए तबाही ले कर आए और इंशाल्लाह वह और तबाही लाएँगे."
टोनी ब्लेयर ने इस बात से इनकार किया था कि सात जुलाई के बम हमले उनकी नीतियों की वजह से हुए थे.
अमरीका को चेतावनी
अल ज़वाहिरी ने अमरीका को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि इराक़ का अंजाम वियतनाम से भी बुरा होगा.
ज़वाहिरी ने दूसरे देशों को भी मुस्लिम इलाक़ों से दूर रहने के लिए कहा है.
ब्रितानी सांसद जॉर्ज गैलोवे समेत कई आलोचकों ने कहा है कि लंदन पर हुए हमले का एक कारण इराक़ पर किया गया हमला है.
टोनी ब्लेयर ने ये तो माना है कि इराक़ के मुद्दे का इस्तेमाल चरमपंथियों को प्रशिक्षित करने में किया जा रहा है लेकिन उनका कहना है कि कट्टरपंथ की जड़ें बहुत गहरी हैं.