न्यूयॉर्क में यमन के एक मौलवी को चरममपंथी गुट अल क़ायदा और हमास के साथ संबंध रखने के मामले में 75 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
शेख़ मोहम्मद अली हसन अल मोयाद को अल क़ायदा और फ़लस्तीनी गुट हमास को मदद पहुँचाने के लिए साजिश रचने का दोषी पाया गया.
उनके साथी मोहम्मद मोहसेन को भी दोषी पाया गया है. मोहसेन को सितंबर में सज़ा दी जाएगी.
जर्मनी में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफबीआई के दो मुखबिरों ने शेख़ मोहम्मद से मिले थे और बातचीत रिकॉर्ड की गई थी.
इस रिकॉर्डिंग में वो हमास को 20 लाख डॉलर से ज़्यादा की राशि देने का वादा कर रहे थे.
उन्हें जर्मनी की पुलिस ने 2003 ने गिरफ़्तार किया था और बाद में उन्हें अमरीका प्रत्यर्पित कर दिया गया.
इस मामले की सूचना देने वालों में से एक मोहम्मद अलांसी ने 2004 में व्हाइट हाउस के सामने ख़ुद को आग लगा ली थी.
उन्होंने शिकायत की थी कि जाँच में मदद करने के बाद एफबीआई ने उनके साथ ठीक बर्ताव नहीं किया था. मुक़दमे के दौरान वे अपने बयान से मुक़र गए थे.