मंगलवार, 19 जुलाई, 2005 को 20:07 GMT तक के समाचार
इराक़ की राजधानी बग़दाद में पुलिस ने कहा है कि संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति के दो वरिष्ठ सदस्यों की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई है.
ये दोनों सदस्य सुन्नी मुस्लिम थे.
पुलिस के अनुसार इन दो सदस्यों के साथ एक अन्य सुन्नी नेता भी इस गोलीबारी में मारा गया.
जिस समय इन्हें गोली मारी गई तब वे एक रेस्तराँ से बाहर निकल रहे थे.
बग़दाद में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संविधान का मसौदा करने वाली समिति अपना काम तेज़ी से कर रही है और संभावना है कि अगस्त तक यह संविधान का मसौदा पेश भी कर देगी.
संवाददाता का कहना है कि काफ़ी लंबे विचार विमर्श के बाद इस समिति में सुन्नी प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था और मंगलवार के हमले का साफ़ मक़सद देश में चल रही राजनीतिक प्रक्रिया को झटका पहुँचना था.
इस बीच मंगलवार को ही राजधानी बग़दाद के उत्तरी हिस्से में बक़ूबा शहर में एक बस पर हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई.
उस बस में दस मज़दूर एक अमरीकी हवाई अड्डे पर ले जा रही थी.
इस हमले में सभी दस यात्रियों की मौत हो गई और तीन अन्य लोग तब हुई जब हमले के बाद बस एक कार से टकरा गई जिसमें कार में सवार तीनों लोगों की मौत हो गई.
मृतक संख्या
उधर मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2003 में इराक़ पर अमरीका के नेतृत्व में हुए हमले के बाद से अभी तक क़रीब 25 हज़ार नागरिक मारे गए हैं और 40 हज़ार से ज़्यादा घायल हुए.
इराक़ बॉडी काउंट और ऑक्सफ़ोर्ड रिसर्च ग्रुप ने ये रिपोर्ट तैयार की है. इसका आधार हैं 10 हज़ार से ज़्यादा मीडिया रिपोर्टें.
रिपोर्ट लिखने वालों में से एक प्रोफ़ेसर जॉन स्लोबोदा ने बताया, "इराक़ में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह इराक़ में हमला करने के फ़ैसले की ऐसी क़ीमत है जिसे भुलाया जा रहा है."
रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ हमले के दूसरे साल मृतकों की संख्या पहले साल की तुलना में क़रीब दोगुनी हो गई है. रिपोर्ट में बढ़ती चरमपंथी घटनाओं का भी उल्लेख है.
रिपोर्ट में इसका भी ज़िक्र है कि आत्मघाती हमले और गोलीबारी की घटनाएँ इराक़ में दिनचर्या सी बन गई हैं. बग़दाद स्थित मुर्दाघर के प्रमुख का कहना है कि वहाँ प्रतिदिन औसतन 30 शव आते हैं.