सोमवार, 18 जुलाई, 2005 को 07:55 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के एक प्रतिष्ठित शोध संस्थान ने कहा है कि इराक़ युद्ध में अमरीका को सैनिक समर्थन के कारण देश पर चरमपंथी हमलों का ख़तरा बढ़ गया है.
लेकिन ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन रीड ने चैटम हाउस की रिपोर्ट को ठुकरा दिया है. उनका कहना है कि दुनियाभर में हो रहे हमले ये दिखाते हैं कि आतंकवाद एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है.
उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं ने इस विचारधारा को ग़लत ठहराया है कि अगर ब्रिटेन इस ख़तरे के ख़िलाफ़ नहीं खड़ा होता तो ज़्यादा सुरक्षित रहता.
लंदन पर हुए हमलों के पहले लिखी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि इराक़ में हमले को समर्थन देने के कारण अल क़ायदा को ब्रिटेन में दुष्प्रचार करने और लोगों को नियुक्त करने में मदद मिली.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इराक़ हमले को समर्थन के कारण अल क़ायदा को यहाँ अपने प्रशिक्षण के लिए आदर्श क्षेत्र मिल गया.
रिपोर्ट
चैटम हाउस और आर्थिक व सामाजिक शोध परिषद ने संयुक्त रूप से ये रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में ब्रिटेन अमरीका के साथ पिछली सीट पर बैठा हुआ है जो बहुत ख़तरनाक नीति है.
शनिवार को ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा था कि लंदन में हुए हमलों को इराक़ युद्ध या अन्य नीतियों से जोड़कर देखना ग़लत होगा.
लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ पर हमले ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ अभियान को नुक़सान पहुँचाया है और अल क़ायदा को अपना दुष्प्रचार करने में मदद की है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अल क़ायदा को दुष्प्रचार करने के साथ-साथ लोगों को नियुक्त करने और धन उगाहने में भी मदद मिली है.
रिपोर्ट के अनुसार इस महीने लंदन में हुए हमलों से पहले ब्रितानी धरती पर कोई बड़ा आतंकवादी हमला 1998 में हुआ था जब पैन एम विमान को लॉकरबी के ऊपर धमाकों से उड़ा दिया गया था.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1990 के दशक के मध्य तक ब्रिटेन की आतंकवाद निरोधक कोशिशें उत्तरी आयरलैंड से ख़तरे पर ही केंद्रित थी.
यह भी दावा किया गया है कि उस समय लंदन का इस्तेमाल कर अन्य स्थानों पर हमले की कोशिश करने रहे आतंकवादी गुटों को कुछ हद तक काम करने की छूट दी गई थी.
रिपोर्ट में 11 सितंबर के हमलों के बाद ख़तरों की व्याख्या करने और आपातकालीन फ़ैसलों के समन्वय के लिए ब्रिटेन के राष्ट्रीय ढाँचे की सराहना की गई है.
लेकिन साथ में यह भी चेतावनी दी गई है कि लंदन की आपातकालीन योजना और देश के बाक़ी हिस्सों की योजनाओं और संसाधनों में काफ़ी अंतर है.